महाशिवरात्रि पर ऐसे करें पूजा; ये है व्रत और पारण की विधि, जानें पूजा की प्रक्रिया

महाशिवरात्रि इस बार 8 मार्च को है और इस दिन सभी शिवभक्त महादेव की आराधना कर उनका आशीर्वाद लेंगे. इस बार शिवरात्रि 8 मार्च को है. त्रयोदशी उपरांत चतुर्दशी का मुहूर्त अति शुभ फलदायक होता है. ऐसे में महाशिवरात्रि का व्रत करने के कुछ नियम हैं. हालांकि इस दिन त्रयोदशी उपरांत चतुर्दशी है, चतुर्दशी पर्व ग्रास होता है. उसी दिन प्रदोष व्रत भी है, जिस कारण यह शिवरात्रि और भी अति शुभ फलदायक रहेगा. त्रयोदशी के बाद चतुर्दशी है, जो रात में नहीं पड़ रहा है. महाशिवरात्रि व्रत आम लोग 8 मार्च को ही करेंगे और 9 तारीख को उस व्रत का पारण करेंगे.

Baba Garib Nath Temple in Muzaffarpur City Bihar - YouTube

शिवरात्रि व्रत करने का जानें पूरा विधान
इस व्रत को विधानपूर्वक करने से भक्तों को अधिक लाभ होता है. यह व्रत कोई भी आसानी से कर सकता है. व्रत को करने से पहले इन नियमों का पालन करना जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि इसके लिए भक्तों को एक दिन पहले एकभुक्त यानी नहाय-खाय से इस व्रत की शुरुआत करनी होती है.

एकभुक्त में लोगों को दिन और रात मे सिर्फ एक बार ही खाना होता है, वो भी सूर्यास्त से पहले ऐसा करना होता है. फिर जाकर दूसरे दिन भक्तों को 8 मार्च शिवरात्रि के दिन व्रत में रहकर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करनी होती है. इस दिन हो सके तो मंदिर में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं और पुनः सूर्यास्त के बाद पारण करें. उन्होंने कहा कि बहुत आदमी ऐसा करते हैं, दिनभर व्रत करते हैं और रात में फलाहार कर दूसरे दिन पारण करते हैं. यह बिल्कुल विधान शास्त्रीय नहीं है. चतुर्दशी का पारण चतुर्दशी में ही होता है, अमावस्या में नहीं होता है.

सच्चे मन से करें पूजा, दयालु हैं औढरदानी
भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करना बहुत आसान है. भगवान भोलेनाथ औढरदानी हैं, वह खुद दयालु हैं. चार चावल और फूल धतूरे के बेलपत्र सहित अन्य चीजों को लेकर पूजा करें या ना करें. बस उनके द्वार पर जाकर सच्ची श्रद्धा के साथ एक बार माथा जरूर टेक लें. इससे निश्चित ही उन्हें इसका फल मिलता है. भोलेबाबा बहुत दयालु हैं और सब कुछ बिना मांगे अपने भक्तों को दे देते हैं.

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