पटना. कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे का पेंच बरकरार है. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के कई सीटों पर सिंबल बांटे जाने को लेकर कांग्रेस ने नाराजगी जताई है. इसको लेकर दिल्ली में दोनों ही पार्टियों के नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है. इस बीच सूत्रों से खबर है कि कांग्रेस ने राजद के सामने रखी अपनी सीटों की लिस्ट रख दी है. किशनगंज, पूर्णिया, समस्तीपुर, सासाराम, पटना साहिब, गोपालगंज संसदीय सीटों पर कांग्रेस का दावा है. लेकिन सबसे अधिक पेंच पूर्णिया लोकसभा सीट को लेकर फंसा हुआ है जिसे पप्पू यादव छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. दूसरी ओर राजद ने जदयू छोड़ आई बीमा भारती को इस सीट से सिंबल दे दिया है. ऐसे में कहा जा रहा है कि हो सकता है कि पप्पू यादव को यह सीट छोड़नी भी पड़ सकती है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पप्पू यादव फिर कहां से चुनाव लड़ेंगे?
दरअसल, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की इच्छा है कि पप्पू यादव मधेपुरा सीट से चुनाव लड़ें, लेकिन पप्पू यादव पूर्णिया सीट को लेकर ही अड़े हुए हैं. इस बीच सूत्रों से खबर है कि महागठबंधन के नेता कोई बीच का रास्ता भी निकाल सकते हैं और न तो पूर्णिया और न ही मधेपुरा, बल्कि पप्पू यादव को सुपौल संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है. दरअसल, इस सीट से उनकी पत्नी रंजीत रंजन लोकसभा सांसद रही हैं और पप्पू यादव के लिए यह सीट आसान हो सकती है. हालांकि, पप्पू यादव मानेंगे या नहीं इसको लेकर अभी संशय है क्योंकि पूर्णिया सीट को लेकर अपना भावुक रिश्ता बताते हुए पप्पू यादव ने इस सीट को कभी नहीं छोड़ने की बात कही थी.

दरअसल, कांग्रेस पप्पू यादव की सीट को लेकर आश्वस्त थी. पप्पू यादव ने कई बार कहा भी है कि ‘पूर्णिया मेरी मां है और मैं पूर्णिया नहीं छोड़ूंगा भले ही जान दे दूंगा’. राजनीति के जानकार कहते हैं कि बीमा भारती की राजद से उम्मीदवारी पप्पू यादव और कांग्रेस की प्लानिंग के लिए बड़ा झटका था. वह भी तब जब पप्पू यादव ने लालू यादव से मिलकर अपनी बात कह दी थी और पूर्णिया की दावेदारी की बात सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी. साफ है कि यह कांग्रेस सकते में पड़ गई, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के कांग्रेस में विलय के बाद राजद सकते में है.

दरअसल, पप्पू यादव ने स्वयं कहा था कि उनकी पार्टी का राजद में विलय करने का ऑफर था, लेकिन उन्होंने कांग्रेस में विलय करना उचित समझा. कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव ही नहीं बल्कि कांग्रेस पप्पू यादव को साथ लेकर भविष्य की ओबीसी राजनीति साधने की जुगत में है और पार्टी का जनाधार बिहार में मजबूत करने की ओर बढ़ना चाहती है. वहीं, राजद अपनी तरह की सोशल इंजीनियरिंग कर रहा है और बीमा भारती जैसे नेताओं को आगे ला रहा है. ऐसे में पूर्णिया सीट न केवल महागठबंधन की रणनीति के लिहाज से बल्कि राजद-कांग्रेस के भविष्य के संबंधों को लेकर भी अहम है.

इस बीच यहां यह भी बता दें कि कांग्रेस ने राजद के सामने सीटों को लेकर कुछ और मांग रखी है. पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और वाल्मिकीनगर में एक सीट देने की मांग की गई है. वहीं, भागलपुर, कटिहार में से एक सीट देने की मांग की गई है. खबर तो औरंगाबाद सीट को लेकर भी है, लेकिन कहा जा रहा है कि चूंकि पहले चरण में ही वहां मतदान है और राजद ने अभय कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बना दिया है तो शायद ही इस सीट पर समझौता हो.







