पटनाः बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की अब सरकार के साथ-साथ गवर्नर से भी तल्खियां बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. राजभवन द्वारा तलब करने के बाद भी सोमवार को केके पाठक नहीं पहुंचे. बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने केके पाठक को तलब करते हुए सोमवार की सुबह 10 बजे उनके चैंबर में उपस्थित होने को कहा था. लेकिन इस आदेश को केके पाठक दरकिनार करते हुए नहीं पहुंचे. वहीं इस घटना से बिहार में अब नई चर्चा शुरू हो गई है. अब सभी की नजर राज्यपाल के अगले कदम पर है.

दरअसल, राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल चोंग्थू ने हाल ही में शिक्षा विभाग के एसीएस केके पाठक को पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने बिहार के सभी यूनिवर्सिटी के कुलपतियों व अन्य पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी. लेकिन केके पाठक नहीं पहुंचे थे.

इस बैठक में अनुपस्थित रहने का कारण जानने के लिए राज्यपाल ने केके पाठक को 15 अप्रैल को राझबवन में उनके दफ्तर में सुबह 10 बजे पहुंचने को कहा था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्यपाल सुबह 10 बजे से अपने चैंबर में बैठकर केके पाठक का इंतजार करते रहे. लेकिन केके पाठक नहीं पहुंचे. करीब आधा घंटा इंतजार करने के बाद राज्यपाल अपने चैंबर से बाहर निकल आए. दरअसल, राज्यपाल यूनिवर्सिटी के खातों को पिछले चार महीने से फ्रीज करने के कारण नाराज हैं.

बिहार के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने बीते मंगलवार को ‘शिक्षा विभाग के अधिकारियों’ पर राज्य भर के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र के नियमितीकरण में बाधा डालने का आरोप लगाया था. बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति ने यह टिप्पणी यहां राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए की थी. राजभवन के एक बयान के अनुसार, कुलपतियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों के बैंक खातों को फ्रीज करने के विभाग के आदेश ने ‘‘परीक्षाओं के समय पर आयोजन और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को प्रभावित किया है’’. विभाग ने पिछले महीने संबंधित कुलपतियों की समीक्षा बैठक में भाग लेने में विफलता के बाद अधिकांश राज्य विश्वविद्यालयों के बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया था.






