बिहार लोकसभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियों ने उतारे अपने बाल-बच्चे, देखें पूरी लिस्ट

इस लोकसभा चुनाव में बिहार के नेताओं के बाल-बच्चों की बरसात हो रही है। अपने बेटा और बेटी को राजनीति में घुसाने के लिए परेशान मां-बाप अपनी मौजूदा पार्टी से टिकट ना मिलने पर गठबंधन की दूसरे दल और यहां तक कि विपक्षी गठबंधन से भी टिकट का जुगाड़ कर रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा सीट पर तो गजब ही हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू के दो मंत्री अशोक चौधरी और महेश्वर हजारी के बच्चे इस सीट पर एनडीए और महागठबंधन के कैंडिडेट बनने में कामयाब रहे हैं। और मजेदार बात ये कि दोनों बच्चे कह रहे हैं कि टिकट दिलाने में उनके पिता का कोई हाथ नहीं है। जिनकी पहचान ही उनके पापा हैं वो कह रहे हैं कि उनकी क्षमता देखकर टिकट मिला है। तो आइए एक नजर मारते हैं पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे बिहार में बड़े नेताओं के रिश्तेदारों पर।

सबसे कम उम्र की दलित कैंडिडेट, पूर्व IPS की बहू... कौन हैं समस्तीपुर से  चुनावी जंग में उतरी शांभवी चौधरी? - bihar nda seat sharing ljp ram vilash  chirag paswan who isसबसे पहले अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी से शुरू करते हैं। नीतीश के सबसे दुलारे मंत्री चौधरी की बेटी चिराग पासवान की लोजपा-आर से जमुई सीट का टिकट मांग रही थीं। लेकिन चिराग को यहां बहनोई अरुण भारती को लॉन्च करना था। तो टिकट जमुई के बदले समस्तीपुर से मिल गया। समस्तीपुर के मौजूदा सांसद प्रिंस राज लोजपा तोड़ने वालों में थे तो उनकी संभावना पशुपति पारस की रालोजपा के साथ बह गई। चिराग से ही समस्तीपुर का टिकट अपने बेटे सन्नी हजारी के लिए मांगने जेडीयू के दूसरे मंत्री महेश्वर हजारी भी दिल्ली गए थे। चिराग के पूरे परिवार के साथ सबकी फोटो आई क्योंकि हजारी पासवान के रिश्तेदार हैं। रामविलास पासवान का ननिहाल हजारी का गांव है। चिराग ने हजारी को खाली हाथ भेज दिया और चौधरी की बेटी को टिकट दे दिया।

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फिर सन्नी हजारी कांग्रेस में शामिल हो गए। महेश्वर हजारी ने कहा कि वो जेडीयू के प्रति समर्पित हैं और बेटे के राजनीतिक फैसले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। कह रहे हैं कि महागठबंधन कैंडिडेट के तौर पर वो सीट जीतकर झोली में डाल देंगे। ये माना कि उनके पिता ने उनको राजनीतिक रूप से काबिल बनाया है कि अब वो खुद लड़ सकते हैं। बोले कि पिता की राजनीति अलग है, उनकी अलग  है। उन्हें लालू का आशीर्वाद मिला है। सन्नी और शांभवी में अंतर ये है कि सन्नी हजारी पहले प्रखंड प्रमुख रहे हैं जबकि शांभवी शुद्ध रूप से घर से कूदकर मैदान में आई हैं।

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अरुण भारती तीसरे कैंडिडेट हैं जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। चिराग पासवान के बहनोई हैं। रामविलास पासवान के दामाद हैं। कह रहे हैं कि लोग उनकी योग्यता को चिराग का बहनोई कहकर खारिज कर देते हैं। लेकिन चिराग की पार्टी के समर्पित कुछ नेता किसी एससी रिजर्व सीट से लड़ना चाहते थे लेकिन चिराग ने ना जमुई में कार्यकर्ता को टिकट दिया और ना समस्तीपुर में। जमुई बहनोई को मिला और समस्तीपुर जेडीयू के नेता की बेटी को।

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चौथी कैंडिडेट हैं लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या। सिंगापुर में बैठकर सोशल मीडिया पर भाजपा और आरजेडी विरोधी दलों की खबर लेते रहीं रोहिणी पहली बार सारण लोकसभा सीट से लड़ रही हैं। यह सीट लालू की सीट रही है। बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ लड़ रहीं रोहिणी के लिए लालू दो बार छपरा गए हैं जबकि वो कहीं भी चुनाव प्रचार के लिए नहीं जा रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पहले लोकसभा लड़कर हार चुके अपने बेटे आकाश सिंह के लिए एक सही सीट की तलाश में महागठबंधन की कई सीट उलझा दी। पूर्णिया सीट आरजेडी को मिलने से हाहाकार मचा है। पप्पू यादव ने ऐसा माहौल बनाया है कि तेजस्वी को पूर्णिया में कैंप करना पड़ रहा है।कांग्रेस ने पूर्णिया समेत 2019 में लड़ी चार सीट चार सीट छोड़ी। बदले में मिला महाराजगंज, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण और भागलपुर। आकाश का नाम हर सीट के लिए चला। टिकट महाराजगंज से मिला जहां जनार्दन सिंह सिग्रीवाल से उनका मुकाबला होगा। भूमिहार और राजपूत बहुल इस सीट पर कई बागी लड़ने वाले हैं। एक तो सच्चिदानंद राय हैं जो स्थानीय निकाय के विधान पार्षद हैं। दूसरे रणधीर सिंह या अरुण सिंह हो सकते हैं जो बसपा में जाने वाले हैं।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के बेटे अंशुल अविजित भी पटना साहिब से टिकट की रेस में हैं। मीरा की सासाराम सीट पर 2019 में बसपा से लड़कर तीसरे नंबर पर रहे मनोज कुमार भारती को कांग्रेस ने टिकट दिया है। सासाराम में बाबू जगजीवन राम परिवार का कोई कैंडिडेट बहुत अर्से बाद नहीं लड़ रहा है। अंशुल का नाम फाइनल माना जा रहा है लेकिन पार्टी ने नाम अटका रखा है।

पूर्णिया से लड़ रहे पप्पू यादव के बेटे सार्थक रंजन चुनाव तो नहीं लड़ रहे हैं लेकिन राजनीति में एंट्री मार ली है। तेजस्वी यादव की तरह सार्थक भी क्रिकेट बैकग्राउंड से आते हैं। पप्पू यादव ने दिल्ली में जब अपनी पार्टी जाप का कांग्रेस में विलय किया तो सांकेतिक रूप से पार्टी की तरफ से दो लोग ही मंच पर थे। एक खुद पप्पू यादव और दूसरा उनके बेटे सार्थक रंजन। संकेत है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में सार्थक रंजन चुनाव लड़ते नजर आएंगे।

 

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