किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अब नहीं जाना पड़ेगा सिंगापुर, पटना के इस सरकारी अस्पताल में हो जाएगा काम

पटना: किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के लिए बिहार के लोगों को दिल्ली एम्स, पीजीआइ, चंडीगढ़ या फिर सिंगापुर जैसे दूसरे देशों के उच्च केंद्रों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि अब बिहार की राजधानी पटना के एम्स में ही किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था बहाल होने वाली है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मानव अंग और उतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत एम्स, पटना को किडनी प्रत्यारोपण के लिए मंजूरी दे दी गयी है. एम्स के कार्यकारी निदेशक और सीइओ डॉ. गोपाल कृष्ण पाल ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट इस साल अगस्त तक शुरू होने की उम्मीद है. आपको बता दें कि पिछले दिनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव ने अपने किडनी का ट्रांसप्लांट सिंगापुर में करवाया था.

Contract staff of Patna AIIMS warned of hunger strike If demands are not  met then mass resignation know what is the matter - पटना AIIMS के संविदा  स्टाफ ने दी अनशन कीकई राज्यों के मरीजों को मिलेगा लाभ
पटना एम्स में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा बहाल हो जाने से ना सिर्फ बिहार के लोगों को सहूलियत मिलेगी बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर पूर्वी राज्यों और यहां तक कि उत्तर प्रदेश और ओडिशा के मरीजों को भी लाभ मिलेगा. वर्तमान में देश के इस हिस्से के मरीजों को ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए दिल्ली एम्स और पीजीआइ, चंडीगढ़ जैसे उच्च केंद्रों में जाना पड़ता है. पटना के IGIMS के बाद एम्स दूसरा सरकारी अस्पताल होगा जहां किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था होगी.

लगेंगे इतने रूपए
डॉ. गोपाल कृष्ण पाल के अनुसार पटना एम्स में निजी संस्थानों की तुलना में बेहद कम खर्च में किडनी ट्रांसप्लांट हो सकेगा. निजी अस्पतालों में किडनी प्रत्यारोपण पर 8 से 10 लाख रुपये खर्च होता है. इसकी तुलना में एम्स लगभग 3 लाख प्रत्यारोपण हो जाएगा. इसमें दाता और प्राप्तकर्ता के लिए दवाओं और अस्पताल में रहने का खर्च भी शामिल है. इसके लिए विभिन्न विशिष्टताओं के सात डॉक्टरों की एक टीम ने पीजीआई, चंडीगढ़ में औपचारिक ट्रेनिंग पूरा कर लिया है. ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले टीम में डॉ. कमलेश गुंजन, डॉ. विपिन चंद्रा, डॉ. अभ्युदय कुमार, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. उपासना सिन्हा, डॉ. तरुण कुमार और डॉ. जुटांग शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थिसियोलॉजी विभाग, किडनी प्रत्यारोपण के लिए महत्वपूर्ण हैं.

दो चरणों में बहाल होगी यह व्यवस्था
यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. कमलेश गुंजन ने कहा कि पहले चरण में किडनी प्रत्यारोपण तभी शुरू होगा, जब मरीजों को रक्त संबंधी डोनर से किडनी मिलेगी. दूसरे चरण में, संस्थान कैडवेरिक ट्रांसप्लांट शुरू करेगा, जहां ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों की सहमति से किडनी निकाली जाएगी. डॉ. गुंजन ने कहा कि हमारे पास पहले से ही पांच डायलिसिस मरीज हैं, जो प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं. इनकी सर्जरी के लिए विभिन्न परीक्षण किए जा रहे हैं.

  

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