बिहार की बिजली व्यवस्था को लेकर एक कहावत है कि बारिश हुआ बात भर और बिजली कटा रात भर। सूबे में तेज आंधी आ जाने या रत्ती भर बारिश हो जाने से सूबे के ग्रामीण इलाकों में कई दिनों तक बिजली गुल रहती है। विभाग हर बार यह बोल कर पल्ला झाड़ लेता है कि बारिश के कारण बिजली गुल है।

तेज आंधी, बारिश के ओट में बिजली विभाग अपनी जिम्मेदारियों से मुहंमोड़ लेता है। वहीं अब इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने एक ऐसी तकनीक विकसित करने में जुटी हुई है जिससे बारिश और वज्रपात के समय बिजली वाधित नहीं होगी। साथ ही बारिश के कारण बिजली के यंत्रों को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। दरअसल, इसके लिए स्पाइक अर्थिंग का प्रयोग किया जाएगा। जिले के चार विद्युत संचरण लाइन में से एक में ट्रायल के तौर पर स्पाइक अर्थिंग लगायी जाएगी। नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (एनबीपीडीसीएल) ने इसे मुजफ्फरपुर समेत अन्य जिलों के लिए हरी झंडी दे दी है। फिलहाल पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर इसे अपनाया जा रहा है।

इसके लिए राशि का भी प्रावधान किया जा रहा है। मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी, कांटी, औराई, कटरा, गायघाट, कांटी, मड़वन आदि प्रखंडों की बिजली संचरण लाइन में इंसुलेटर जलने, तार जलने, ब्रेक डाउन आदि की समस्या बारिश के दिनों में अधिक होती है। नतीजतन बिजली आपूर्ति प्रभावित रहती है।

क्या है स्पाइक अर्थिंग
स्पाइक अर्थिंग का उपयोग 11 केवी व 33 केवीए पोल के लिए किया जाएगा। इसमें 25 गुणा 6 मिमी, 1.5 मीटर जीएल फ्लैट, 2.5 मीटर लंबा स्पाइक अर्थिंग इलेक्ट्रोड होता है, जिसमें आवश्यक छेद होता है। इसका उपायेग अक्सर सिस्टम के इंसुलेशन को आंधी और मूसलाधार बारिश के दौरान बिजली के नुकसान से बचाने के लिए किया जाता है।

एनबीपीडीसीएल के एक इंजीनियर ने बताया कि स्पाइक अर्थिंग का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में बिजली संचरण लाइन में किया जा रहा है। इससे वहां तेज आंधी, बारिश व वज्रपात में भी बिजली आपूर्ति बहुत प्रभावित नहीं होती है। इसी को देखते हुए एनबीपीडीसीएल ने स्पाइक अर्थिंग के इस्तेमाल को लेकर योजना तैयार की है। अधीक्षक अभियंता पंकज राजेश ने बताया कि फिलहाल यह किशनगंज में प्रयोग किया जाएगा। सफल होने पर मुजफ्फरपुर सर्किल में भी लगाया जाएगा।

बता दें कि सूबे में जब से मानसुन की शुरूआत हुई है। तब से उत्तर बिहार के कई जिलों में तेज आंधी-पानी के दौरान बिजली के पोल गिरने के मामले सामने आए। जिसके कारण कई जगहों पर बिजली वाधित हुई। जिसके कारण मुजफ्फरपुर के कांटी, मड़वन, कुढ़नी, औराई और मीनापुर में आपूर्ति प्रभावित हो गयी थी।

कुढ़नी, कांटी व मड़वन में छह दिनों तक आपूर्ति बाधित रही थी। बिजली कंपनी को राजस्व के नुकसान के साथ उपभोक्तओं का आक्रोश भी झेलना पड़ा था। इस स्थिति से निबटने के लिए स्पाइक अर्थिंग की योजना पर फोकस किया गया है।



