बिहार के करीब 70 प्रतिशत नए थाना भवन बनकर तैयार हो चुके हैं। बाकी 30 प्रतिशत थाना भवनों का निर्माण कार्य भी 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, जल्द ही पुराने थाना भवनों की सूरत भी बदली जाएगी।

राजधानी के कोतवाली समेत विभिन्न जिलों में मौजूद पुराने थाना भवनों की जमीन पर ही नई इमारतें बनाई जाएंगी। इन इमारतों में पुलिसकर्मियों के रहने की भी सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा अनुसंधान कक्ष, रिकार्ड रूम भी अलग से बनाए जाएंगे। बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम ने इस दिशा में कवायद शुरू कर दी है।

राज्य सरकार का पहला लक्ष्य भवनहीन और भूमिहीन थाना भवनों का निर्माण करना है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 974 भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी, जिसमें 643 थाना भवनों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। वहीं, 230 थाना भवन निर्माणाधीन हैं, जबकि 45 थाना भवनों के लिए निविदा आमंत्रित की गई है।

दो दर्जन थाना भवनों का निर्माण विवादित स्थल होने के कारण अटका है, जबकि दस थाना भवनों का निर्माण स्थल अनुपयुक्त होने के कारण लंबित है। आधा दर्जन थाना भवनों के लिए स्थल अनुपलब्ध है, जिसके लिए जमीन चिह्नित करने का काम जारी है।

पर्यटन, साइबर और ट्रैफिक थानों का भी होगा निर्माण
बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के द्वारा अगले चरण में पर्यटन, साइबर और नए ट्रैफिक थानों के निर्माण की भी योजना है। राज्य के सभी 40 पुलिस जिलों में साइबर थानों का निर्माण किया जाना है। इन साइबर थाना भवनों में अत्याधुनिक लैब आदि की भी व्यवस्था होगी। इसके अलावा 28 नए जिलों में स्वीकृत किए गए ट्रैफिक थानों के लिए भवन निर्माण की योजना भी प्रक्रियाधीन है। चार जिलों में पर्यटन थाना भी बनाया जाना है।

वर्तमान में राज्य में 184 नक्सल थानों को बनाए जाने की स्वीकृति है, जिसमें 157 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 23 निर्माणाधीन हैं। इसी तरह 413 आदर्श पुलिस थानों में 154 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 184 निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा 55 रेल थाने, 21 ग्रामीण थाने और 16 ट्रैफिक थाने भी निर्माण की प्रक्रिया में हैं।
