नालंदा: शादी के सीजन की शुरुआत हो चुकी है. रोजाना सैकड़ों शादियां हो रही हैं, लेकिन इस दौरान कुछ शादियां ऐसी भी हो रही हैं, जो किसी न किसी वजह से सुर्खियां बन रही है. ऐसा ही एक मामला बिहार के नालंदा ज़िले से सामने आया है. यहां जबरदस्ती एक युवक की शादी करायी गई है.

नालंदा में जबरिया शादी
नालंदा में बिहारशरीफ सिविल कोर्ट के मुंशी का बीच रास्ते अपहरण कर लिया गया और पकड़ौआ शादी करा दी गई. जबरन विवाह कराए जाने का विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई. मामला रहुई थाना क्षेत्र का है.
कोर्ट में मुंशी है युवक
इस शादी ने 90 के दशक की याद को फिर से लोगों के जेहन में ताजा कर दी है. रहुई थाना क्षेत्र के एक गांव के एक युवक की जबरन शादी कराने के मामले से सभी अचरज में हैं. पीड़ित युवक बिहारशरीफ सिविल कोर्ट में मुंशी के तौर पर कार्यरत है.
कोर्ट से घर लौटने के दौरान अपहरण
इस संबंध में बताया जाता है कि पीड़ित मुंशी बिहारशरीफ़ कोर्ट से कार्य ख़त्म कर बाइक से घर जा रहा था. उसी क्रम में रहुई थाना क्षेत्र के भंडारी मोड़ के समीप कुछ लोगों ने उसे बंधक बना रास्ते से उठा ले गए. गांव ले जाकर युवक के साथ मारपीट की गई और दबाव डालकर उसकी जबरन शादी करा दी गई.
युवक के साथ मारपीट
घटना के संबंध में पीड़ित के परिजनों ने बताया कि घायल युवक को इलाज के लए रहुई के सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में भर्ती कराया गया था, जहां उसका इलाज किया गया. वहीं पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए युवक को बेहतर इलाज के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल रेफर कर दिया है, जहां वह इलाजरत है.
क्या होता है पकड़ौआ विवाह?
पकड़ौआ या पकड़वा विवाह यानी वो शादी जिसमें योग्य लड़के का अपहरण कर लिया जाता है और जबरन उसकी शादी करायी जाती है. 80 के दशक में उत्तर बिहार खासकर बेगूसराय में पकड़ौआ विवाह के बहुत से मामले सामने आए. आलम ये था कि हर सात से आठ गांव में इसके लिए गिरोह चलते थे और शादी के सीजन में इनकी बहुत डिमांड रहती थी.

क्या कहते हैं आंकड़े?
बिहार पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2014 में 2526 पकड़ौआ शादी के मामले सामने आए. वहीं 2015 में 3000, 2016 में 3070 और नवंबर 2017 को 3405 शादी के लिए किडनैप के मामले सामने आए. इसमें प्रेम प्रसंग में घर से भागने वाले प्रेमी युगल के आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया.
क्या कहता है राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो
राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2015 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 18 से 30 साल के युवकों का सबसे अधिक अपहरण हुआ. यह देश में इस एज ग्रुप में हुए अपहरण का लगभग 16 फीसदी है.


