पटना. देश के सात राज्यों में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है, जिसमें बिहार भी शामिल है. बिहार में 1980 में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा दिया गया था. उर्दू भाषा और इससे जुड़े लोगों की सबसे अच्छी स्थिति बिहार में ही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सरकारी कार्यालयों, जिलों, प्रखंडों और सचिवालयों में उर्दू अनुवादकों और सहायक उर्दू अनुवादकों की बहाली कर एक नया इतिहास रचा है.

उर्दू के समुचित कार्यान्वयन, विकास और प्रचार-प्रसार के लिए गठित उर्दू निदेशालय को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 17 अप्रैल, 2018 को राज्य मंत्री परिषद की बैठक हुई. इसमें उर्दू अनुवादक संवर्ग के विभिन्न कोटि के कुल 1765 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई. इनमें 1407 पद सीधी नियुक्ति के लिए और 359 पद पदोन्नति के लिए हैं.
इनमें सहायक उर्दू अनुवादक के 1204 पद वेतन लेवल 5, उर्दू अनुवादक के 404 पद (50% सीधी नियुक्ति, 50% प्रोन्नति) वेतन लेवल 6, वरिष्ठ उर्दू अनुवादक के 119 पद वेतन लेवल 8 और उर्दू अनुवादक पदाधिकारी के 38 पद वेतन लेवल 9 शामिल हैं.

इन पदों की मंजूरी और बहाली का उद्देश्य उर्दू भाषा को बढ़ावा देना और उर्दू छात्रों को सरकारी नौकरियों से जोड़ना है. बिहार मदरसा बोर्ड के आलिम और फाजिल पास छात्रों को भी इन बहालियों में शामिल होने का मौका मिला है. इससे उर्दू से जुड़े लोगों का हौसला बढ़ा है. वर्षों बाद इतने बड़े पैमाने पर उर्दू से जुड़े लोगों के लिए बहाली निकली है. कई वर्षों से खाली पड़े उर्दू से संबंधित पदों को बहाल किया गया और नए पद भी सृजित किए गए. वर्षों से अपनी प्रोन्नति का इंतजार कर रहे उर्दू अनुवादकों को भी प्रोन्नति दी गई.

उर्दू अनुवादकों और सहायक अनुवादकों की बहाली के लिए 5 नवंबर, 2019 से आवेदन आमंत्रित किए गए और 30 नवंबर, 2019 तक स्वीकार किए गए. इसके लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई. बिहार सरकार उर्दू के इन पदों पर बहाली के लिए प्रतिबद्ध थी, इसलिए 190 उर्दू अनुवादकों का रिजल्ट जारी किया गया और उन्हें नियमित रूप से बहाल कर दिया गया. इन्हें राज्यकर्मी का दर्जा प्राप्त है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर उर्दू के नए पद सृजित किए गए और बहाली प्रक्रिया भी चल रही है.
अब राजभवन, मुख्यमंत्री सचिवालय, सचिवालय के सभी विभाग, बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग, बिहार राज्य सूचना आयोग, बिहार मानवाधिकार आयोग, बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग, बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, बिहार राज्य महिला आयोग, बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग, आईजी कार्यालय, डीआईजी कार्यालय, एसपी कार्यालय, एसडीपीओ कार्यालय, थाना, समाहरणालय, प्रखंड कार्यालय, रजिस्ट्री कार्यालय में उर्दू अनुवादक शामिल हैं. इसके लिए 23 नवंबर, 2024 को 1175 उर्दू सहायक अनुवादकों की बहाली के लिए रिजल्ट जारी कर दिया गया है.

इस तरह इन सफल अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी में शामिल होने का मौका मिल गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उर्दू आबादी, खासकर मुसलमानों के लिए यह एक बड़ा तोहफा है और उर्दू भाषा के अस्तित्व और संरक्षण के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम माना जाएगा. इससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि वह हर वर्ग के लिए बिना भेदभाव के काम करते हैं और किसी भी प्रकार की कोताही नहीं करते.
सरकारी स्तर पर यदि कोई गजट या पुस्तिका हिंदी में प्रकाशित होती है तो उसे उर्दू में भी प्रकाशित किया जाएगा. राज्यभर में उर्दू भाषा लिखने और बोलने को बढ़ावा देने के लिए विभागीय निर्देश जारी किया गया है. इसके अतिरिक्त सड़कों और सरकारी भवनों के नाम और आधिकारिक निमंत्रण पत्रों में हिंदी के साथ उर्दू के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए कैबिनेट सचिवालय ने निर्देश जारी किया है और सभी विभागों के कार्यालय प्रमुखों और बैंकों के शाखा प्रबंधकों को भी इसका अनुपालन करने को कहा गया है.

जिन राज्यों में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है, वहां की तुलना में बिहार में उर्दू की स्थिति काफी बेहतर है, क्योंकि किसी भी भाषा को बढ़ावा तब मिलता है, जब वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़ी हो. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जा रहे हैं. उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार और इसके विकास के लिए बिहार में उर्दू निदेशालय की स्थापना की गई है. पिछले वर्ष और चालू वर्ष में बड़े पैमाने पर उर्दू अनुवादकों और सहायक उर्दू अनुवादकों की बहाली कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार सरकार जाति और समुदाय से ऊपर उठकर सभी के विकास के लिए काम कर रही है.
