जहानाबाद के ग्रामीण इलाकों में नीलगायों के आतंक ने किसानों को बेहाल कर दिया है। रबी की फसल में मसूर, सरसों, आलू और अन्य सब्जियां प्रमुख हैं, बड़ी मेहनत से उगाई जाती हैं। लेकिन झुंड में घूमने वाली नीलगाय इन फसलों को चरने और रौंदने से पीछे नहीं हट रही हैं। सिकरिया, मोकर, गोनवा, शर्मा, सिसरा, बिरुपुर और रामपुर जैसे सैकड़ों गांव इस संकट से प्रभावित हैं। किसान अब प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

खेती ही है किसानों का मुख्य सहारा
जहानाबाद जैसे पिछड़े इलाके में कृषि ही किसानों का मुख्य जीवनयापन का साधन है। यहां के किसान पूरी पूंजी लगाकर फसल उगाते हैं। लेकिन नीलगायों के कारण फसल बर्बाद होने से उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है। किसान चंनदीप प्रसाद ने बताया कि झुंड के झुंड नीलगाय खेत में घुसकर फसल को चट कर जाते हैं और रौंद भी देते हैं। इससे हम लोगों को भारी नुकसान हो रहा है।

फसल की रखवाली में किसान कर रहे अनोखे प्रयास
नीलगायों से फसलों को बचाने के लिए किसान खेतों में बिजूका (आदमी के आकार की आकृतियां) लगाकर रखवाली करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ये प्रयास भी असफल साबित हो रहे हैं। किसान उमाशंकर सिंह ने बताया कि नीलगाय दो बीघा की फसल बर्बाद कर देती हैं। इससे किसान आर्थिक तंगी में फंस जाते हैं। शिकायत करने पर भी प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलती।

प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव
जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडे का कहना है कि अब तक किसानों की ओर से कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि अगर कोई शिकायत आती है, तो वन विभाग के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान किया जाएगा। हालांकि, किसानों का आरोप है कि नीलगायों के बढ़ते आतंक पर प्रशासन की निष्क्रियता उनकी समस्याओं को और गंभीर बना रही है।

हाल ही में हुई जनप्रतिनिधियों की बैठक में मुखियाओं को निर्देश दिया गया कि वे वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करें। इसके बावजूद, जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही नीलगायों से बचाव के उपाय नहीं किए गए, तो उन्हें खेती छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा।

