भूखों की उम्मीद जगा दीदी की रसोई में लटका ताला, होटल का भोजन खाने को मजबूर हैं मरीज

मोतिहारी जिले के अरेराज अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में 5 महीने पहले जीविका दीदी रसोई का उद्घाटन धूमधाम से किया गया था। उद्घाटन के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और प्रसव कराने आई महिलाओं को उम्मीद थी कि अब उन्हें कम पैसे में पौष्टिक भोजन और नाश्ता मिलेगा। लेकिन उद्घाटन के बाद से ही जीविका रसोई में हमेशा ताला लटका रहता है।

अस्पताल में प्रसव के लिए आई एक महिला के परिजन ने बताया कि “गुब्बारे और फूल मालाओं से सजाकर जीविका रसोई का उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए खिचड़ी लाने के लिए भी आधा किलोमीटर दूर बाजार जाना पड़ता है।” उन्होंने बताया कि अनुमंडलीय अस्पताल होने के बाद भी अस्पताल में मरीजों के लिए खाना और नाश्ता की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुदूर ग्रामीण इलाकों से भोजन मंगवाना पड़ता है या फिर शहर जाना पड़ता है।

जीविका रसोई का निर्माण पिछले वर्ष बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के तहत कराया गया था। अधूरा जीविका दीदी रसोई का रंग-रोगन कर वेंडर द्वारा उद्घाटन करा लिया गया, लेकिन अभी तक शौचालय की टंकी नहीं बनी है और न ही शुद्ध पेयजल के लिए बोरिंग की व्यवस्था की गई है।
अस्पताल परिसर में सरकार द्वारा जीविका रसोई खोलने का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में भर्ती मरीजों को कम कीमत पर पौष्टिक और शुद्ध भोजन नाश्ता उपलब्ध कराना है और जीविका दीदियों को रोजगार देना है।
अरेराज अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि जीविका रसोई में शौचालय की टंकी, बिजली वायरिंग और पानी के लिए बोरिंग का कार्य पूरा नहीं होने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका है। उन्होंने बताया कि अभी बिजली वायरिंग और बोरिंग का कार्य पूरा हो गया है और शौचालय की टंकी बनते ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।

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