भूमि सर्वेक्षण का पहला चरण पूरा, 13 जिलों के 661 गांवों में जमीन सर्वे का काम खत्म

बिहार में  पहला चरण वर्ष 2020 में शुरू हुआ था, जिसमें 20 जिलों के 89 अंचलों को शामिल किया गया था। अब तक, 13 जिलों के 44 अंचलों में कुल 661 राजस्व गांवों का खतियान (अंतिम अधिकार अभिलेख) और नक्शा तैयार किया गया है। इस प्रक्रिया के तहत, प्रत्येक गांव की सीमा और खेतों का नक्शा तैयार किया जाता है, जिसके बाद खानापुरी प्लॉट मालिक की पहचान की गई है।17 फरवरी, 2025 को बिहार सरकार ने इस संबंध में गजट प्रकाशित किया, जिसमें सचिव जय सिंह के हस्ताक्षर शामिल हैं। यह गजट उस क्षेत्र विशेष के संबंध में अधिकार अभिलेखों का अंतिम रूप से प्रकाशन करने का निर्णायक साक्ष्य माना जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी संबंधित पक्षों को सही जानकारी उपलब्ध हो सके।

बिहार में  कुल 45859 मौजों में से पहली बार 661 गांवों में जमीन सर्वे का काम आखिरकार पूरा हो गया है। 300 अन्य गांवों के अंतिम प्रकाशन का काम अंतिम चरण में है, जिसे जल्द अधिसूचित कर दिया जाएगा। अब अंतिम रूप से प्रकाशित इन सभी मौजों में नए नक्शे के मुताबिक भूमि की मापी और नए खतियान के अनुसार म्यूटेशन का काम जल्द शुरू किया जाएगा।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हवाई सर्वे के बाद 20 जिलों के 89 अंचलों में भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त के प्रथम चरण का काम शुरू हुआ था।

इनमें से 13 जिलों के 44 अंचलों के 661 मौजों का सर्वेक्षण, जिसमें खतियान एवं नक्शा सम्मिलित है, पूर्ण हो चुका है। शेखपुरा, बेगूसराय, बांका, जहानाबाद और लखीसराय जिलों ने इसमें अच्छी प्रगति की है। मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बताया कि सरकार की यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भूमि प्रबंधन के साथ सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।

2020 से 89 अंचलों के 4927 गांवों में जमीन सर्वे शुरू हुआ, अब 661 में पूरा।20 अगस्त 2024 तक सभी 45859 मौजों में से 38211 मौजों में दूसरे चरण के तहत सर्वे की घोषणा, जुलाई 2026 डेडलाइन है।शहरी, असर्वेक्षित, टोपोलैंड या विवादित मौजों में सर्वे बाद में होगा।भूमि सर्वे 4 चरणों में पूरा किया जाता है। किस्तवार में गांव की सीमा और खेतों का नक्शा तैयार किया जाता है।खानापुरी-प्लॉट मालिक की पहचान, खेत का कच्चा खतियान बनाना।

बिहार में 90 वर्षों के अंतराल के बाद वर्ष 2011 में विशेष भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त अधिनियम बनाया गया और 2012 में नियमावली लागू की गई। पहला सर्वे 1890 से 1920 के बीच हुआ था, जिसे कैडेस्ट्रल या साविक सर्वे कहा गया। स्वतंत्रता के बाद 1952 में रिविजनल सर्वे हुआ।शेखपुरा राज्य का पहला जिला होगा, जहां दो माह में सर्वे पूरा हो जाएगा। सचिव जय सिंह ने बताया कि शेखपुरा जिले के 284 गांवों में से 207 का अंतिम प्रकाशन हो चुका है। अगले एक-दो माह में यहां सर्वे पूरा हो जाएगा। बेगूसराय के साम्हो अंचल के 56 मौजों में से 50 में सर्वे पूरा हो चुका है। यहां भी जल्द ही नए दस्तावेजों के आधार पर काम होगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इसे राज्य सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि शेखपुरा, बेगूसराय, बांका, जहानाबाद और लखीसराय जैसे जिलों ने इस काम में अच्छी प्रगति दिखाई है। इसके अलावा, अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि लगभग 300 अन्य गांवों के अंतिम प्रकाशन का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही सभी को अधिसूचित कर दिया जाएगा।

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