प्रकाश सिन्हा (संपादक) की कलम से।
मुज़फ़्फ़रपुर चित्रगुप्त एसोसिएशन की वर्तमान जर्जर हालत और अव्यवस्था को देखकर इसके संस्थापक डॉ. श्यामनंदन सहाय और 1999 तक अध्यक्ष रहे कृष्णनंदन सहाय की आत्मा कराह रही है। वे आज कायस्थ समाज को पुकार कर कह रही हैं कि इस ऐतिहासिक संस्था का पुनरुद्धार किया जाए।

मुज़फ़्फ़रपुर चित्रगुप्त एसोसिएशन की स्थापना 1930 में हुई थी। इसके बाद बिहार विश्वविद्यालय के पहले कुलपति और पद्मभूषण सम्मानित डॉ. श्यामनंदन सहाय ने संस्था को छाता चौक स्थित 22 कट्ठा भूमि दान की। इस भूमि पर बाद में दुकानों और एक प्रार्थना सभा (जो अब विवाह भवन है) का निर्माण कराया गया। उनके पुत्र कृष्णनंदन सहाय ने 1999 तक अध्यक्ष पद पर रहकर संगठन को नई दिशा दी। इन दोनों महान व्यक्तित्वों ने एसोसिएशन की नींव और उसके विकास में अविस्मरणीय योगदान दिया।

कायस्थ समाज के दीप स्तंभ: कृष्णनंदन सहाय
कृष्णनंदन सहाय, बिहार की धरती पर जन्मे ऐसे विभूति थे जिन्होंने समाजसेवा, शिक्षा और राजनीति के क्षेत्र में अतुलनीय कार्य किए। 1938 में उन्होंने तिरहुत शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय की स्थापना की, जिसका उद्घाटन बिहार के तत्कालीन राज्यपाल ए. आर. किदवई ने किया। यह संस्था आज भी शिक्षा और शारीरिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में अग्रणी है।
राजनीतिक जीवन में सहाय जी सात बार पटना के मेयर बने। उनके कार्यकाल में शहर के विकास ने गति पकड़ी और कायस्थ समाज को एक मज़बूत प्रतिनिधित्व मिला। साथ ही, उन्होंने अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कायस्थ समुदाय को राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने का कार्य किया।
उनकी स्मृति में मुज़फ़्फ़रपुर में रविनंदन सहाय इंडोर स्टेडियम का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और कायस्थ समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
24 सितंबर 2024 को उनकी 105वीं जयंती पर तिरहुत शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय में भव्य कार्यक्रम हुआ, जिसमें सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने उन्हें “प्रेरणा का स्रोत” बताया।

कायस्थ समाज के लिए सहाय जी के प्रमुख योगदान:
• शिक्षा में योगदान: तिरहुत शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय की स्थापना।
• राजनीति में नेतृत्व: सात बार पटना के मेयर, नगर विकास में योगदान।
• सामाजिक एकता: अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कायस्थ समाज की एकजुटता के लिए प्रयास।
• सांस्कृतिक विकास: रविनंदन सहाय इंडोर स्टेडियम का निर्माण, समाज के नाम एक स्थायी धरोहर।
कृष्णनंदन सहाय का जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा नेतृत्व कैसे समाज, शिक्षा और संस्कृति को समर्पित होकर एक नई दिशा दे सकता है। अब समय आ गया है कि कायस्थ समाज उनके बताए मार्ग पर चलते हुए मुज़फ़्फ़रपुर चित्रगुप्त एसोसिएशन के पुनरुद्धार के लिए एकजुट हो।




