मुजफ्फरपुर। चित्रगुप्त एसोसिएशन अध्यक्ष पद के पराजित प्रत्याशी डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक खुला पत्र जारी किया है। उन्होंने वर्तमान कोषाध्यक्ष और संगठन पदाधिकारियों से कई तीखे सवाल पूछते हुए यह स्पष्ट किया है कि अब सवाल पूछने का नहीं, जवाब देने का समय आ गया है।

पूर्व महामंत्री, अध्यक्ष एवं संगठन मंत्री को संबोधित इस पत्र में डॉ. सिन्हा ने कहा कि जो व्यक्ति पहले आय-व्यय का हिसाब न मिलने पर शिकायत करता था, आज वही जब कोषाध्यक्ष हैं, तो अब पारदर्शिता की नैतिक जिम्मेदारी उनकी नहीं बनती क्या? उन्होंने तंज करते हुए लिखा कि “जिसने हिसाब माँगा, वही सत्ता में आते ही मौन क्यों हो गया?”

व्यक्तिगत शक्ति नहीं, टीम की छाया में सफलता
डॉ. सिन्हा ने पूर्व और वर्तमान कोषाध्यक्षों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब ये प्रभावशाली टीम के साथ थे तो जीते, और जब अलग हुए तो हार गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों ही व्यक्तिगत प्रभाव से नहीं, बल्कि किसी सशक्त टीम की छाया में सफल होते रहे हैं।

संगठन मंत्री से भी सीधा सवाल
डॉ. सिन्हा ने संगठन मंत्री से यह जानना चाहा है कि वर्ष 2022 से 2025 तक कितने सक्रिय सदस्य बनाए गए? उनके हस्ताक्षर से कितनी सदस्यताएं स्वीकृत हुईं? कायस्थ समाज के लिए कौन-कौन से कल्याणकारी कार्य हुए?

विशेष प्रश्न:
कितनी लड़कियों की शादी नि:शुल्क कराई गई? कितने वार्ड प्रतिनिधि बनाए गए? समाज में कौन से स्थायी योगदान दिए गए?
चंदा और व्यय का खुलासा जरूरी
डॉ. सिन्हा ने वर्ष 2023 और 2024 की वार्षिक पूजा में प्राप्त चंदे और हुए व्यय का विस्तृत विवरण आमसभा में सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संगठन के प्रति सच्ची निष्ठा का आधार बताया।

शब्दों में पीड़ा, आग्रह में आग्रह
“क्या यह सब बताए बिना नैतिकता के साथ शपथ लेना संभव है?” — इस एक सवाल से डॉ. सिन्हा ने पूरे संगठन को आत्ममंथन के लिए विवश कर दिया है।
अपने पत्र के अंत में उन्होंने स्वयं को ‘हारा हुआ अध्यक्ष’ कहकर संबोधित करते हुए यह जताया है कि चुनावी हार के बावजूद समाज और संगठन के लिए उनकी निष्ठा कम नहीं हुई है।



