वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा पर फूटा आक्रोश — सरकार की योजनाओं की सच्चाई पर सवाल

मुजफ्फरपुर/रांची। देशभर में वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती उपेक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियों को लेकर सरकार के प्रति आक्रोश तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और पंजाब नेशनल बैंक से सेवानिवृत्त बैंकर अनुप कुमार सिन्हा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 10 वर्षों में घोषित कल्याणकारी योजनाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अनुप कुमार सिन्हा, पंजाब नेशनल बैंक से सेवानिवृत्त

अनूप सिन्हा का कहना है कि सरकार की योजनाएं महज चुनावी लाभ और वोट बैंक को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, जिनका असली लाभ ज़रूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कहा कि लगातार प्रचार और दिखावे के बावजूद ज़मीनी हकीकत बहुत अलग है। बीते एक दशक से वे और उनकी टीम वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, परंतु सरकार और संबंधित मंत्रालयों ने इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है।

महेश प्रसाद सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार

रेल यात्रा में रियायतें खत्म, बुजुर्गों के लिए कोई राहत नहीं

सिन्हा ने रेल मंत्रालय की उस नीति की कड़ी आलोचना की जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली यात्रा रियायत को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर देश की आर्थिक वृद्धि दर को तीन गुना बढ़ा हुआ बताती है, वहीं दूसरी ओर मंत्रालय यह कहकर रियायतें देने से इंकार करता है कि देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। यह विरोधाभास न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि बुजुर्गों के साथ धोखा भी है।

बुजुर्गों की अनदेखी, संस्कारों पर चोट

अनूप सिन्हा ने सरकार से यह भी पूछा है कि “जो सरकार अपने बुजुर्गों को सम्मान और सुविधा नहीं दे सकती, वह देश को कैसे विकसित बना सकती है?” उन्होंने यह भी जोड़ा कि बुजुर्गों की उपेक्षा करने वाली नीतियों ने भारतीय समाज की परंपराओं और संस्कारों को भी प्रभावित किया है। अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि बुजुर्गों को अपने अधिकारों के लिए विदेशी सहायता की ओर देखना पड़ रहा है।

विदेशी सहायता का सुझाव

सिन्हा ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि अगर सरकार की आर्थिक स्थिति वाकई इतनी कमजोर है, तो उसे विकसित देशों से आर्थिक सहायता लेकर बुजुर्गों के लिए आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये बुजुर्ग ही हैं जिन्होंने अपने खून-पसीने से देश को बनाया है, और अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाए।

राष्ट्रीय स्तर पर उठी आवाज

यह मुद्दा ‘शिकायत सुझाव मंच’ नामक सामाजिक टीम द्वारा उठाया गया है, जिसके टीम लीडर वरिष्ठ पत्रकार महेश प्रसाद सिन्हा हैं। यह टीम वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। महेश सिन्हा मुजफ्फरपुर, बिहार में रहते हैं, जबकि अनूप सिन्हा रांची, झारखंड में सक्रिय हैं।

सिन्हा की पोस्ट सरकार के लिए एक चेतावनी है कि यदि समय रहते वरिष्ठ नागरिकों के हितों की अनदेखी की जाती रही, तो यह न केवल सामाजिक विघटन को जन्म देगा, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करेगा। अब समय आ गया है कि बुजुर्गों की आवाज़ को अनसुना न किया जाए, बल्कि उनके सम्मान और सुविधा के लिए ठोस नीतियाँ लागू की जाएँ।

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