पटना: बिहार में राजस्व कर्मचारियों के निलंबन और फिर उसकी वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राजस्व कर्मचारियों पर की गई अनुशासनिक कार्रवाई पूरी तरह नियमावली के तहत जिला समाहर्ताओं द्वारा की गई थी. इसमें किसी मंत्री स्तर से सीधे निलंबन का आदेश जारी नहीं किया गया था.

निलंबित राजस्व कर्मचारियों की बहाली का फैसला
विभाग ने साफ किया है कि बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग नियमावली 2025 के अनुसार नियुक्ति और अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार जिलों के समाहर्ताओं को प्राप्त है और उसी प्रावधान के तहत यह कार्रवाई की गई. विभागीय जानकारी के अनुसार 11 फरवरी से 19 अप्रैल 2026 के बीच जिन राजस्व कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, वह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देशों के आलोक में की गई थी.

224 राजस्व कर्मचारियों को किया गया था निलंबित
13 अप्रैल को अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल द्वारा जारी पत्र में उन कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई का निर्देश दिया गया था, जो कार्य पर वापस नहीं लौटे थे. इसी पत्र के आधार पर 14 और 15 अप्रैल को राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 224 राजस्व कर्मचारियों को निलंबित किया गया. यह कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और सरकारी कार्यों में बाधा रोकने के उद्देश्य से की गई थी.

विजय सिन्हा ने नहीं दिया था आदेश
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा किसी भी स्तर पर सीधे निलंबन का आदेश नहीं दिया गया था. अधिकारियों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन द्वारा नियमों के अनुरूप संचालित की गई.

संबंधित समाहर्ताओं का था निर्णय
हाल के दिनों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई थी, जिसके बाद विभाग ने आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने का फैसला लिया. सरकार का कहना है कि अनुशासन और प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना आवश्यक था, इसलिए संबंधित समाहर्ताओं ने अपने अधिकार क्षेत्र में निर्णय लिया.

जनगणना कार्य के मद्देनजर फैसला
निलंबन वापसी को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट जानकारी दी है. 19 अप्रैल को अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल द्वारा जारी एक अन्य पत्र में भारत की जनगणना 2027 के मद्देनजर राजस्व कर्मचारियों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया. पत्र में कहा गया कि जनगणना जैसे बड़े राष्ट्रीय कार्य में राजस्व कर्मियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है, इसलिए समाहर्ताओं को आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया. इसके बाद जिलों में नियमों के अनुसार निलंबन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई.

व्यवस्था सामान्य करने की कोशिश
इसके अलावा 17 अप्रैल को कार्य पर लौटने वाले कर्मचारियों के संबंध में भी विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए थे, ताकि प्रशासनिक कार्यों को सामान्य स्थिति में लाया जा सके. भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, लगान रसीद, अतिक्रमण हटाने और अन्य राजस्व संबंधी सेवाओं में कर्मचारियों की भूमिका अहम होती है. ऐसे में सरकार की प्राथमिकता रही कि व्यवस्था जल्द सामान्य हो और आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
