पटना: पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मृतक कर्मचारी के परिवार में पहले से कोई कमाने वाला सदस्य मौजूद है और उसकी आय से आश्रितों का भरण-पोषण संभव है, तो अनुकंपा के आधार पर नौकरी का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता. जस्टिस पार्थ सारथी की एकलपीठ ने सिट्टू कुमार की याचिका खारिज करते हुए बेगूसराय जिला अनुकंपा समिति के फैसले को बरकरार रखा.

इसलिए आश्रित को अनुकंपा पर नौकरी नहीं मिलेगी- HC
हाईकोर्ट की बेंच ने साफ किया कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद अगर उसके घर में कोई कमाने वाला सदस्य नहीं है और भरण पोषण के लिए आय का कोई साधन नहीं है तभी आश्रित को अनुकंपा पर नौकरी दी जा सकती है.
अनुकंपा समिति का आश्रित को नौकरी देने से इनकार
मामले में बेगूसराय जिला अनुकंपा समिति द्वारा मृतक के आश्रित को अनुकंपा पर नौकरी देने से इनकार कर दिया था. समिति का कहना था कि आवेदक के बड़े भाई सरकारी नौकरी में हैं, इसलिए उन्हें नौकरी नहीं दी जा सकती है. जिसके बाद मामले को पीड़ित परिवार द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

सिट्टू कुमार ने अपने पिता बिनोद शर्मा, जो बीएसएपी में हवलदार थे और 10 मार्च 2016 को निधन हो गया था, अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की मांग की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि ”बड़े भाई सचिन कुमार अलग रहते हैं और उनकी आय परिवार के भरण-पोषण के लिए उपलब्ध नहीं है, इसलिए उन्हें नौकरी दी जाए.”

कोर्ट का अनुकंपा समिति को पुनर्विचार का निर्देश
इस मामले में पहले हाईकोर्ट ने 2022 में डीजीपी, बिहार को निर्देश दिया था कि फुल बेंच के फैसले नीरज कुमार मलिक बनाम बिहार राज्य के आलोक में पुनर्विचार किया जाए. इसके बाद जिला अनुकंपा समिति ने 28 जुलाई, 2023 को फिर से सुनवाई कर आवेदन रद्द कर दिया.
अनुकंपा समिति ने कोर्ट को क्या बताया?
सरकार की ओर से बताया गया कि सिट्टू के बड़े भाई जेल पुलिस वार्डन हैं और नियमित वेतन पा रहे हैं. कोर्ट ने पाया कि उपलब्ध आय परिवार के लिए पर्याप्त है. इसी आधार पर याचिका को निराधार बताते हुए रद्द कर दिया गया.

सरकारी नौकरी में क्या पिता की मौत के बाद बेटे को नौकरी मिलती है, लेकिन नियम क्या कहता हैं?. अगर सरकारी नौकरी में सेवा के दौरान किसी कर्मी की मृत्यु हो जाती है तो ऐसी स्थिति में सरकारी कर्मियों के लिए अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान है. सरकार की ओर से परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दी जाती है.

क्या है प्रावधान?
इसके भी नियम होते है. केवल परिवार के सदस्य (पति, पत्नी, बेटा, अविवाहित बेटी) ही इसके लिए पात्र होते हैं. लेकिन यहां जांचा जाता है कि परिवार में कोई सदस्य कमाने वाला न हो. साथ ही मृत्यु के 5 साल के भीतर आवेदन करना जरूरी होता है.

