ये 202 विधायकों का नहीं, 10 हजार से खरीदा बहुमत है; सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर का तंज

बिहार : बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया, लेकिन इस पर विपक्ष और सियासी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने खगड़िया में मीडिया से बातचीत के दौरान इस बहुमत को “लोकप्रियता का बहुमत” मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अगर यह जनसमर्थन का वास्तविक बहुमत होता, तो पहले से बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन से चुना गया मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा नहीं जाता।

202 विधायकों का नहीं बल्कि 10 हजार से खरीदा गया बहुमत

उन्होने कहा कि 202 विधायकों का नहीं बल्कि 10 हजार से खरीदा गया बहुमत है। चुनाव आयोग की मदद से हासिल किया हुआ है। सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर हासिल किया बहुमत है। पिछले दरवाजे से बहुमत को हासिल किया गया था और जिन लोगों ने बहुमत को हासिल करने में भूमिका अदा की थी उन लोगों ने नीतीश कुमार को हटाया और अपने के व्यक्ति को बैठाया। पीके ने आरोप लगाया कि “यह 10 हजार रुपये में खरीदा गया बहुमत है” और इसे “बैक डोर” से हासिल किया गया। उनका यह भी दावा है कि जिन लोगों ने इस बहुमत को तैयार करने में भूमिका निभाई, उन्होंने ही नीतीश कुमार को हटाकर अपने पसंद के नेता को मुख्यमंत्री बनाया।

उनका चाल-चरित्र पहले ही हमने बता दिया था- पीके

सम्राट चौधरी पर टिप्पणी करते हुए किशोर ने उनके “चाल, चरित्र और चेहरे” पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी को किसी अदालत ने पूरी तरह बरी नहीं किया है, बल्कि नाबालिग होने के कारण उन्हें राहत मिली थी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी अपने दम पर मुख्यमंत्री नहीं बने हैं, बल्कि उन्हें नरेंद्र मोदी और अमित शाह के समर्थन से यह पद मिला है। उनका चाल-चरित्र पहले ही हमने बता दिया था।

सम्राट सरकार ने पास किया फ्लोर टेस्ट

आपको बता दें सम्राट सरकार ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से रखे गए एक पंक्ति के प्रस्ताव को सदन ने ध्वनिमत से स्वीकृत किया। मतदान की नौबत नहीं आई। इसके पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक पंक्ति का प्रस्ताव सदन में पेश किया, जिसमें कहा गया कि ‘यह सभा वर्तमान राज्य मंत्रिपरिषद में विश्वास व्यक्त करती है।’ करीब 100 मिनट की चर्चा के बाद सदन ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित किया। । विपक्ष ने मत विभाजन की मांग नहीं रखी। विस अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विश्वासमत प्रस्ताव के पक्ष में फैसला सुनाया।

नीतीश के रास्ते पर चलेगी बिहार सरकार- सीएम सम्राट चौधरी

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नयी सरकार नीतीश कुमार के बताए रास्ते पर ही चलेगी। उन्होंने खुद को लालू प्रसाद की पाठशाला का बताने पर कड़ी आपत्ति की और कहा कि वे उन्हीं के अत्याचारों के कारण सीएम बने हैं। वहीं, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा ने सेलेक्टेड की जगह इलेक्टेड सीएम बना ही लिया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इसका प्रतिकार किया।

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