बिहार : बिहार की राजनीति इन दिनों फिर एक बार सत्ता-समीकरणों के नए अध्याय की ओर बढ़ती दिख रही है। एक तरफ पश्चिम बंगाल चुनाव का शोर थम गया है तो दूसरी तरफ पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी हलकों में मंत्रिमंडल विस्तार की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में दिल्ली में हुई एक अहम मुलाकात ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है, जहां संजय झा के आवास पर जदयू और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत हुई।

सूत्रों के मुताबिक, यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि आने वाले मंत्रिमंडल विस्तार की रणनीति पर गंभीर चर्चा का हिस्सा मानी जा रही है। इस बैठक में नीतीन नबीन की मौजूदगी ने संकेत और मजबूत कर दिए हैं कि बिहार में सत्ता के भीतर जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

इधर, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। अभी स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री मिलकर करीब 47 विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिससे प्रशासनिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार का संभावित समय पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद तय किया गया है। संभावना जताई जा रही है कि 6 मई के आसपास यह बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आ सकता है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि बीजेपी और जदयू के बीच “50-50” फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है जिसके तहत दोनों दलों को बराबर हिस्सेदारी मिलेगी, जबकि सहयोगी दलों को भी कुछ मंत्री पद दिए जाएंगे। इस फॉर्मूले के तहत बीजेपी कोटे से मुख्यमंत्री समेत 16 मंत्री और जदयू कोटे से डिप्टी सीएम सहित 16 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, जबकि बाकी 4 मंत्री सहयोगी दलों से हो सकते हैं।

हालांकि, अप्रैल के अंत में कैबिनेट विस्तार की जो अटकलें तेज थीं, वे अब ठंडी पड़ती दिख रही हैं। 29 अप्रैल की कैबिनेट बैठक के बाद संकेत मिला कि तत्काल विस्तार संभव नहीं है, लेकिन अब दिल्ली की हलचल ने एक बार फिर सियासी समीकरणों को गर्म कर दिया है। बहरहाल बिहार की राजनीति इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां हर मुलाकात, हर बयान और हर फॉर्मूला आने वाले बड़े सत्ता समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।
