औरंगाबाद: कहते हैं कि दुनिया में मां की ममता से पवित्र कोई दूसरी शै नहीं है, लेकिन जब यही ममता जिद, जूनून और जुर्म की स्याही से लिखी जाए, तो दास्तान रूह को कंपा देती है। बिहार के औरंगाबाद से सामने आई यह दास्तान महज एक जुर्म की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानी जज्बात, तड़प, बेबसी और रिश्तों के उस ताने-बाने का ऐसा दर्दनाक मंज़र है, जिसने कानून के रखवालों से लेकर पूरे समाज की आंखों को आंसू से तर कर दिया है। यह कहानी है उस अभागी कोख की जिसका सुहाग भी छिना और औलाद की चाहत ने उसे मुजरिम बना दिया, और उस मां की जिसने चार साल तक हर लम्हा अपने कलेजे के टुकड़े के लिए मातम मनाया।

यह दर्दनाक सिलसिला साल 2022 में औरंगाबाद के मशहूर ओबरा देवी मंदिर से शुरू हुआ था। वट सावित्री पूजा का पवित्र दिन था, चारों तरफ सुहागिनों की भीड़ थी और हर ओर खुशियों का माहौल था। इसी पूजा के बीच, चार साल का मासूम शिवा पांडे अचानक गायब हो गया। जैसे किसी ने मां-बाप की जीती-जाती दुनिया में अंधेरा फूंक दिया हो। रोते-बिलखते माता-पिता ने मंदिर का जर्रा-जर्रा छान मारा, मिन्नतें कीं, दुआएं मांगीं, पुलिस के चक्कर काटे, लेकिन शिवा का कहीं कोई सुराग न मिला। साल गुजरते गए, वक्त के बेरहम थपेड़ों ने जख्मों पर धूल तो डाल दी, पर मां के दिल की तड़प कम न हुई। घर का वह सूना पालना हर रोज़ एक मां की रूह को लहूलुहान करता रहा।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बीते शनिवार यानी 16 मई को जब दोबारा वट सावित्री का ही पवित्र दिन था, औरंगाबाद पुलिस एक दूसरे बच्चे की तलाश में सरगर्मी से जुटी थी। इसी तफ्तीश के दौरान गयाजी जिले के डेल्हा मुहल्ले के खरखुरा स्थित न्यू एरिया इलाके से एक ऐसी खबर आई जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। वहां एक महिला के पास एक संदिग्ध बच्चा देखा गया था। पुलिस ने जब वहां छापेमारी की, तो चौंक उठी। वहां सिर्फ वह नया बच्चा ही नहीं, बल्कि चार साल पहले ओबरा मंदिर से गायब हुआ शिवा पांडे भी मिल गया। पूरे महकमे में खलबली मच गई। कानून की नजर में यह एक बड़ी कामयाबी थी, लेकिन कुदरत के रंगमंच पर अभी सबसे दर्दनाक मुकाम आना बाकी था।

जब पुलिस थाने में शिवा को उसके असली माता-पिता के सामने लाया गया, तो वहां का मंज़र देखकर पत्थर दिल इंसान भी रो पड़े। चार साल से अपनी औलाद के लिए तड़प रही असली मां जैसे ही मेरा शिवा, मेरा बच्चा कहकर आगे बढ़ी, मासूम सहम गया। वह अपनी पैदाइशी मां को पहचान तक नहीं पाया। उसके लिए वह औरत एक अजनबी थी। शिवा ने अपनी असली मां की बाहों में जाने के बजाय चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। वह रोते हुए पीछे हटा और उस आरोपी महिला के आंचल में छिपने की जिद करने लगा, जिसने उसे चुराया था। वह बिलख-बिलख कर कह रहा था कि मुझे मेरी मां के पास जाने दो। परिजनों की आंखों में चार साल के सूखे सावन के बाद बेटे को पाने की असीम खुशी तो थी, लेकिन इस बात का जानलेवा मलाल भी था कि उनका अपना ही खून उन्हें पूरी तरह भूल चुका था।
जब पुलिस ने आरोपी महिला मंजू देवी को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो जुर्म की आड़ में छिपी एक औरत की दिमागी तबाही की दास्तान सामने आई। महिला ने रोते हुए कुबूल किया कि शादी के कई बहारें बीत जाने के बाद भी उसकी कोख सूनी रही। औलाद न होने के इस जुर्म की सजा उसे समाज और उसके पति ने दी। पति ने उसे बेसहारा छोड़कर दूसरी शादी उसकी हीं बहन से कर ली। इस तन्हाई ने उसे दिमागी तौर पर तोड़ दिया था।

वह पागलपन की हद तक एक बच्चे के लिए तड़पने लगी। इसी दीवानगी में वह अक्सर मंदिरों और भीड़ भाड़ वाली जगहों में भटकती थी। साल 2022 के उस मनहूस दिन, ओबरा देवी मंदिर में उसे मासूम शिवा दिखा। महिला की ममता इस कदर अंधी और जालिम हो गई कि उसने कानून और धर्म के सारे नियम ताक पर रख दिए और बच्चे को लेकर रफूचक्कर हो गई। इन चार सालों में उसने शिवा को पाला नहीं, बल्कि अपनी जान से ज्यादा अजीज रखा, उसे हर वो खुशी दी जो एक मां दे सकती है।
फिलहाल, पुलिस के आला अधिकारियों की देखरेख में मासूम शिवा की काउंसिलिंग कराई जा रही है, ताकि उसके नन्हे और सहमे हुए दिमाग से उस औरत का अक्स धीरे-धीरे धुंधला हो सके और वह अपने सगे परिवार की मोहब्बत को कुबूल कर सके।

यह सनसनीखेज वाकया जहां हमारी कानून-व्यवस्था और पुलिसिया तंत्र पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है कि आखिर चार साल तक एक बच्चा पड़ोसी जिले में रहा और खुफिया तंत्र सोता रहा? वहीं दूसरी तरफ, यह वाकया इंसानी जज्बात और संगीन जुर्म के बीच की उस बेहद बारीक लकीर को बयां करता है, जहां एक औरत का औलाद के लिए तड़पना तो सच था, मगर उस तड़प को मिटाने के लिए अख्तियार किया गया रास्ता गलत था। कानून अपना काम कर रहा है, मगर इस कशमकश में जीत चाहे जिसकी हो, हार तो मां की ही हुई है, चाहे वह औलाद की चाहत में ममत्व का हो या जन्म देने वाली मां के कलेजे का….