पटना: अपराध करने वालों को माला मत पहनाइए, बल्कि अपराधियों की तस्वीर पर माला चढ़ा दीजिए। बिहार के हुक्मरान सम्राट चौधरी के ये बड़े-बड़े दावे और कड़े तेवर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। सूबे के मुख्यमंत्री बार-बार पुलिस महकमे को ताकीद करते हैं कि बिहार में क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म (अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता) पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल किया जाए। लेकिन जमीनी हकीकत इन खोखले दावों का मजाक उड़ा रही है। राजधानी पटना में गुंडागर्दी और दबंगई इस कदर चरम पर पहुंच चुकी है कि अब आम शहरी खुद को पूरी तरह महफूज नहीं समझ रहा।

ताजा मामला पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र का है, जहां बेखौफ अपराधियों ने सरेशाम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। पुलिसिया गश्त और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलती यह खौफनाक वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।

सड़क पर बिखरा खून और खून-खराबाका वो मंजर!
राजीव नगर थाना इलाके में अपराधियों ने सरेआम दहशत का वो नंगा नाच नाचा कि देखने वालों की रूह कांप गई। वाकया 29 मई की देर रात करीब 8 बजकर 41 मिनट का है। एक दवा दुकानके बाहर दो बेकसूर युवक खड़े थे,तभी अचानक घात लगाए अपराधियों ने उन पर जानलेवा हमला बोल दिया।

अपराधियों ने बिना किसी खौफ के दोनों युवकों को लहूलुहान कर दिया। वारदात के बाद सड़क पर चारों तरफ खून बिखर गया। सीसीटीवी में कैद खून-खराबा की यह पूरी दास्तान इस बात की गवाही दे रही है कि अपराधियों के दिलो-दिमाग से पुलिस का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरेबाजार हुई इस खूनी झड़प और तांडव से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

दहशत में लोग, सुस्त पुलिस प्रशासन!
सवाल है कि नाकाम साबित हो रही खाकी? इस खौफनाक मंजर के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश है। जिस पुलिस पर शहर की हिफाजत का जिम्मा है, उसकी नाक के नीचे बेखौफ बदमाश वारदातों को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जा रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी मुस्तैदी का ढिंढोरा पीटने वाली पटना पुलिस लकीर पीटती नजर आ रही है। आला अधिकारियों का रटा-रटाया बयान सामने आया है कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अपराधियों को बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस पेट्रोलिंग का दावा किया जाता है, तो फिर अपराधियों में इस कदर बेखौफी क्यों है? सरेआम सड़क लहूलुहान हो जाती है, मगर खाकी वक्त पर पहुंचना तो दूर, मुस्तैद होने की झूठी तसल्ली देती रहती है। राजधानी के इस बदतर होते जरायम (अपराध) के ग्राफ को देखकर अब जनता सिर्फ यही कह रही है “जनाब, ये पटना पुलिस है, इसके दावों का क्या!” बहरहाले सूबा ए बिहार के राजधानी का हाल ये है तो बाकी जिलों का अंदाजा आप खुद लगा लीजिए…
