बिहार के गया जिले में एक भैंस को लेकर ऐसा पेंच फंसा है कि अब पुलिस को भी उसके असली मालिक तक पहुंचने के लिए विज्ञान का सहारा लेना पड़ रहा है। अतरी थाना क्षेत्र में एक भैंस पर दो पक्षों ने अपना-अपना दावा ठोक दिया है। मामला इतना उलझा कि अब भैंस के वास्तविक मालिक की पहचान के लिए डीएनए जांच कराने का आदेश दिया गया है।मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीण एसपी दिव्यांजलि जायसवाल को जांच में तेजी लाने और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही भैंस के वास्तविक मालिक को लेकर अंतिम फैसला किया जाएगा।

एक भैंस, दो दावेदार और पुराना विवाद
ग्रामीणों के मुताबिक मोहड़ा के सेउतर गांव निवासी सूरज यादव की भैंस कुछ दिन पहले कहीं चली गई थी। काफी तलाश के बाद पता चला कि भैंस उपथू के महाचक गांव पहुंच गई है और नौरंगा टोली में रहने वाले प्रकाश मांझी ने उसे अपने पास रखा है।जानकारी मिलते ही सूरज यादव भैंस को खोजते हुए नौरंगा पहुंचे और उन्होंने भैंस चोरी होने का मामला दर्ज कराया। इसके बाद अतरी थाना पुलिस ने भैंस को थाने बुलाया और बाद में सूरज यादव को सौंप दिया।लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। अतरी थाना प्रभारी पर एक पक्ष की मदद करने का आरोप लगने के बाद पुलिस ने भैंस को दोबारा थाने बुला लिया। कुछ दिनों तक भैंस थाने में रही और बाद में फिलहाल उसे सूरज यादव को सौंप दिया गया।

दूसरे पक्ष का दावा- ‘चार साल पहले चोरी हुई थी’
विवाद का दूसरा पहलू भी कम दिलचस्प नहीं है। प्रकाश मांझी के पक्ष के लोगों का दावा है कि चार साल पहले उनकी यही भैंस चोरी हो गई थी। उनका कहना है कि भैंस को अपना पुराना घर और जगह पहले से पता थी, इसलिए वह खुद वापस लौट आई।यानी एक पक्ष भैंस को अपनी बताकर चोरी का आरोप लगा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष दावा कर रहा है कि भैंस पहले उनकी थी और वर्षों पहले चोरी होने के बाद अब वापस लौटी है। दोनों दावों के बीच पुलिस के सामने असली मालिक की पहचान सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

अतरी थानाप्रभारी पर गंभीर आरोप
बता दें मामला सूरज देव यादव की भैंस के स्वामित्व से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि भैंस को अतरी थाना परिसर में बांधकर रखा गया था। जब इसकी जानकारी सूरज यादव को हुई तो वह थाने पहुंचे।बताया गया कि कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भैंस उन्हें सौंप दी गई। लेकिन इसके बाद कथित तौर पर भैंस को फिर से थाने लाए जाने की बात सामने आई। यहीं से पूरे मामले ने सियासी और प्रशासनिक रंग पकड़ लिया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि भैंस को लेकर कार्रवाई में विधायक रोमित कुमार के दबाव की भूमिका बताई जा रही है। विवाद के बीच अतरी थानाध्यक्ष अजय कुमार की ओर से दर्ज कराए गए कथित आवेदन/विवरण में पत्रकार कमलनयन उर्फ राजीव कुमार और उनके कैमरामैन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।विवाद के बीच कथित तौर पर इस मामले को लेकर खबर चलाने वाले एक पत्रकार के खिलाफ भी थानेदार द्वारा केस दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद स्थानीय पत्रकारों और ग्रामीणों में भी नाराजगी बढ़ गई।मामले में एक और पेचीदा मोड़ तब आया, जब भैंस के मालिक सूरज यादव पर भी एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किए जाने का दावा सामने आया।इसके बाद स्थानीय लोगों और समर्थकों में और नाराजगी फैल गई। सवाल उठने लगा कि आखिर एक पशु के स्वामित्व का विवाद पुलिस और प्रशासन के बीच इतना बड़ा कानूनी संघर्ष कैसे बन गया।एक तरफ भैंस मालिक और उसके समर्थक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस ने पत्रकार के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, कथित धमकी और अन्य आरोपों का हवाला दिया है।लगातार बढ़ते विवाद के बाद मामला पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंचा। मगध रेंज के आईजी विकास वैभव ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया और जांच गया के ग्रामीण एसपी को सौंप दी।

अब DNA टेस्ट बताएगा असली मालिक
मगध रेंज के आईजी विकास वैभव ने कहा कि अतरी में भैंस को लेकर दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद चल रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रामीण एसपी को निष्पक्ष जांच का आदेश दिया गया है।उन्होंने साफ किया कि दोनों पक्ष भैंस पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। ऐसे में वास्तविक मालिक का पता लगाने के लिए डीएनए जांच कराने का निर्देश दिया गया है। पुलिस जांच में डीएनए रिपोर्ट अहम सबूत बन सकती है और इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। भैंस के मालिकाना हक को लेकर चल रहा यह विवाद अब गांव की पंचायत या दावों तक सीमित नहीं रहा।उधर अतर अतरी थानाप्रबारी पर भी गंभीर इल्जाम है।आईजी विकास वैभव ने वैज्ञानिक जांच का रास्ता अपनाया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि डीएनए रिपोर्ट आखिर किसके दावे पर मुहर लगाती है और चार साल पुराने इस कथित विवाद का सच सामने कैसे आता है।