पटना: बिहार के पटना की दरधा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है. तेज बहाव में देवधा-इमलिया-मठिया ग्रामीण सड़क का करीब 200 फीट हिस्सा बह गया है. सड़क के बह जाने से देवधा, इमलिया और मठिया गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है. ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वीर-कुशवन मार्ग पर भी दरधा नदी का पानी चढ़ने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है. लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं.
धान की फसल डूबी
इसके अलावा लोकाइन और महातमाइन नदी का तटबंध टूट गया है. इससे 25 गांवों के करीब दो हजार बीघे में लगी धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है. किसानों को भारी नुकसान हुआ है. खेतों में पानी भरने से फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं.
सर्वाधिक स्तर पर जलस्तर
बाढ़ नियंत्रण विभाग, पटना के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि दरधा नदी का जलस्तर अब तक के सर्वाधिक स्तर 56.12 मीटर तक पहुंच गया है. ऐसी स्थिति में कहीं भी नदी का पानी तटबंध तोड़ सकता है या ओवरफ्लो हो सकता है. इससे निपटने के लिए विभाग की पूरी मशीनरी अलर्ट पर लगाई गई है.

लोगों में दहशत का माहौल
लगातार बढ़ रहे जलस्तर से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. अब तक धनरूआ की तकरीबन चार पंचायतें इससे प्रभावित हुई हैं. हालांकि घरों तक पानी अभी तक नहीं पहुंचा है. इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है. लेकिन कई जगहों पर तटबंध टूटे हैं, जिन्हें मरम्मत करने में प्रशासन जुटा हुआ है. खेत पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं.
प्रभावित गांवों की सूची
जानकारी के मुताबिक वीर पंचायत का हादसापुर और इमलिया गांव प्रभावित हैं. वहीं सांडा पंचायत के सीताचक और चनाकी गांव प्रभावित हैं. देवधा पंचायत का पूरा देवधा गांव, भखरी और मुस्तफापुर गांव प्रभावित हैं. वहीं धनरूआ पंचायत के नदपुरा और अलीपुर अभी तक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. एसडीएम धनराज कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाके में लगातार दौरा किया जा रहा है. जहां-जहां जो भी सूचनाएं मिल रही हैं, उस पर युद्ध स्तर से कटावरोधी कार्य किए जा रहे हैं.
बिहार की नदियां इन दिनों पूरी तरह से अपना रौद्र रूप दिखा रही हैं. गंगा और पुनपुन के बाद दरधा नदी भी अपने पूरे उफान पर है. पिछले 15 सालों के बाद एक बार फिर से दरधा नदी अपना रौद्र रूप दिखा रही है. धनरूआ में कई पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई हैं. कई जगहों पर सड़कें टूट गई हैं. तटबंध टूट चुका है और संपर्क टूट रहा है.

रेल परिचालन पर असर
पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से अब रेल परिचालन पर भी असर पड़ने लगा है. कल देर रात में पुनपुन नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था. रात करीब 8 बजे पुनपुन घाट स्थित रेल पुल संख्या-21 के डाउन लाइन ट्रैक तक बाढ़ का पानी सट गया.
अप लाइन से चलीं ट्रेनें
फिलहाल अप लाइन से ट्रेनों को गुजारा जा रहा है. इसके तहत 22350 वंदे भारत एक्सप्रेस, 2346 जनशताब्दी एक्सप्रेस और 63258 डाउन पैसेंजर सहित कई ट्रेनों को चलाया गया. इन सभी को पुनपुन घाट से परसा बाजार तक अप लाइन से निकाला गया.
अप लाइन पर भी खतरा
उन्होंने बताया कि नदी का जलस्तर अभी और बढ़ रहा है. यदि अगले 30-40 सेंटीमीटर जलस्तर और बढ़ा तो सुरक्षा के लिहाज से अप लाइन का परिचालन भी बंद करना पड़ सकता है. स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. रेलवे ने 5 सितंबर को चलने वाली चार मेमू ट्रेनों को रद्द कर दिया है. रद्द ट्रेनों में 63242, 63244, 63245 और 63247 गया-पटना / पटना-गया मेमू शामिल हैं.

युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य
इधर पटना जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त तटबंधों और टूटी सड़कों की मरम्मत युद्धस्तर पर शुरू कर दी है. जल संसाधन विभाग की टीम लगातार प्रभावित इलाकों में निगरानी कर रही है. जहां-जहां कटाव हुआ है, वहां बोरियों और जेसीबी की मदद से मरम्मत कार्य कराया जा रहा है.
1976 के बाद रौद्र रूप
दरअसल बताया जा रहा है कि 1976 के बाद पुनपुन नदी अपने रौद्र रूप में है. यहां 53.28 मीटर का जलस्तर रिकॉर्ड किया गया है. बाढ़ नियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. इसके कारण आसपास के इलाकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
