पटना के पास गंगा नदी पर बना कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6 लेन महासेतु आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। हालांकि पुल का औपचारिक उद्घाटन अभी बाकी है, लेकिन वाहनों की आवाजाही शुरू हो चुकी है। इस महासेतु के चालू होने से पटना और हाजीपुर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ ही राघोपुर दियारा के लोगों की वर्षों पुरानी मुश्किल भी काफी हद तक खत्म हो गई है।

बारिश के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद राघोपुर दियारा चारों तरफ पानी से घिरकर टापू जैसा बन जाता था। यहां आने-जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता था। कई बार यह सफर जोखिम भरा भी साबित होता था। अब महासेतु और इसके कनेक्टिंग रोड के जरिए राघोपुर का सड़क संपर्क पटना और हाजीपुर से साल के 12 महीने बना रहेगा।
हालांकि पुल की सौगात के साथ टोल टैक्स को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। राघोपुर एलिवेशन पर टोल प्लाजा बनाया जा रहा है। इसके चालू होने के बाद पुल के रास्ते राघोपुर में प्रवेश और बाहर निकलने वाले वाहनों को टोल देना होगा। अभी आधिकारिक तौर पर टोल की दर घोषित नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक कार से पटना आने-जाने वालों को करीब 60 से 80 रुपये तक टोल देना पड़ सकता है। बस और ट्रक जैसे बड़े वाहनों के लिए शुल्क वाहन की श्रेणी और आकार के अनुसार अधिक होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल उनके लिए महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि लाइफलाइन है। ऐसे में रोजमर्रा के काम के लिए पुल का इस्तेमाल करने पर बार-बार टोल देना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। लोग टोल प्लाजा हटाने की मांग कर रहे हैं।बिहार में नेशनल हाईवे नेटवर्क के विस्तार के साथ पटना आने-जाने वाले विभिन्न मार्गों पर टोल प्लाजा भी बढ़े हैं। बिहटा की तरफ से आने वालों को बिहटा-सरमेरा मार्ग पर टोल देना पड़ता है। भागलपुर, बेगूसराय, नवादा और बिहारशरीफ की ओर से आने वाले वाहनों के लिए जीरो माइल क्षेत्र के पास टोल है। गया की तरफ से आने पर टेहटा क्षेत्र में टोल पड़ता है, जबकि मुजफ्फरपुर से पटना आने वाले यात्रियों को हाजीपुर से पहले टोल टैक्स देना पड़ता है।

महासेतु के शुरू होने से गांधी सेतु, बिहटा-कोईलवर पुल और वीर कुंवर सिंह सेतु पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है। मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, कोसी और सीमांचल की ओर जाने वाले वाहनों को पटना शहर में दाखिल हुए बिना बाइपास मार्ग मिलेगा। यह पुल पटना रिंग रोड और निर्माणाधीन आमस-दरभंगा फोरलेन एक्सप्रेस-वे को भी बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इससे दानापुर, दीघा, शिवाला, बिहटा, कन्हौली, डुमरी, नयागांव, तेलवारीचक, कच्ची दरगाह और सबलपुर के बीच लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

राघोपुर दियारा में महासेतु से जुड़ा 4.57 किलोमीटर का हिस्सा भी वाहनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। सरकार अब पूरे दियारा इलाके को सुरक्षित करने के लिए चारों तरफ बांध निर्माण की योजना पर काम कर रही है। भविष्य में यहां इंडस्ट्रियल एरिया, लॉजिस्टिक हब और आईटी पार्क विकसित करने की तैयारी है। यानी महासेतु सिर्फ पुल नहीं, बल्कि राघोपुर के आर्थिक कायाकल्प की नई बुनियाद बन सकता है।