पटना: ऐसा लगता है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को ‘गुजरात मॉडल’ पसंद आने लगा है, क्योंकि उन्होंने इसको लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को चिट्ठी लिखी है. आरजेडी नेता ने जन वितरण प्रणाली के विक्रेताओं की समस्या को लेकर सीएम को पत्र लिखकर उनके लिए मानदेय देने की मांग की है.

सम्राट चौधरी को चिट्ठी लिखी
अपनी चिट्ठी में तेजस्वी यादव ने पीडीएस सिस्टम पर कई सवाल खड़े किए हैं, जिसमें उन्होंने गुजरात मॉडल के तहत पीडीएस विक्रेताओं को मानदेय देने की बात कही है. विपक्ष के नेता ने आठ बिंदुओं पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है. हालांकि ये चिट्ठी 4 सितंबर को लिखा गया था लेकिन इसे प्रतिपक्ष के नेता द्वारा बुधवार को रिलीज किया गया है.

समस्याओं का समाधान नहीं होता
तेजस्वी यादव ने पत्र में लिखा है कि जन वितरण प्रणाली के विक्रेता राज्य की सार्वजनिक वितरण व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है. वह कठिन परिस्थितियों में भी लाखों गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने का कार्य करते हैं. इसके बावजूद लंबे समय से उनकी आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है. पूर्व डिप्टी सीएम ने लिखा, ‘रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, बढ़ती प्रशासनिक कठिनाइयां, कमीशन के भुगतान में विलंब और तकनीकी समस्याओं के कारण पीडीएस विक्रेताओं के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है.’

आठ बातों का जिक्र
तेजस्वी यादव ने पीडीएस विक्रेताओं की मांगों को लेकर आठ बिंदु रखे हैं, जिसमें गुजरात की तर्ज पर पीडीएस विक्रेताओं को न्यूनतम 30000 रु प्रति माह निश्चित मानदेय दिया जाए. झारखंड की तर्ज पर अनुकंपा नियुक्ति की समय सीमा समाप्त करते हुए पत्र आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए.
लंबित कमिशन का तत्काल भुगतान हो
तेजस्वी ने ये भी मांग की है कि पिछले 6 माह से 1 वर्ष तक लंबित कमिशन का तत्काल भुगतान किया जाए. कमीशन का भुगतान लंबित रहने से हजारों पीडीएस विक्रेताओं और उनके परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. विधानसभा चुनाव से पूर्व पीडीएस विक्रेताओं के कमीशन में 47 रुपए की वृद्धि की घोषणा की गई थी. उन्होंने कहा कि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद यदि उक्त बढ़ी हुई राशि का भुगतान नहीं हुआ तो उसे तत्काल प्रभाव से लागू कर बकाया राशि का भुगतान कराया जाए.

चिट्ठी में आगे लिखा है कि बिहार राज्य खाद्य निगम के गोदाम में कथित भ्रष्टाचार, अनियमत्ता और घटतौली की शिकायतों पर कठोर कार्रवाई की जाए और पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए. नापतोल, घटतौली, ई पॉस मशीन, सर्वर और अन्य समस्याओं का रियल टाइम समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि तकनीकी खामियों का खामियाजा पीडीएस विक्रेताओं और लाभुकों को न भुगतना पड़े.
स्थायी समाधान जरूरी
आरजेडी नेता ने लिखा कि पीडीएस व्यवस्था से संबंधित अनावश्यक प्रशासनिक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए विक्रेताओं को वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर प्रभावित शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए. पीडीएस विक्रेताओं की समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए सरकार, विभागीय अधिकारियों और फेयर प्राइस डीलर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की नियमित त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की जाए.