बिहार परिवहन विभाग में नए नियुक्त हुए लगभग 26 मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) और प्रवर्तन अवर निरीक्षक (ESI) पिछले दो महीनों से अपनी पहली पदस्थापना (Posting) के इंतजार में बैठे हैं। विभाग में शीर्ष स्तर पर जारी प्रशासनिक खींचतान और मतभेदों का खामियाजा इन नए अधिकारियों को भुगतना पड़ रहा है। चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अधिकारियों को अब तक जिला या कार्यक्षेत्र आवंटित नहीं किया जा सका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परिवहन विभाग में इस गतिरोध की मुख्य वजह मंत्री और विभागीय सचिव के बीच आपसी तालमेल की कमी है।

तबादलों और पदस्थापना की फाइलों को लेकर दोनों के बीच लगातार पीत-पत्र (ऑफ़िशियल नोट) का दौर जारी है। नीतिगत फैसलों और पसंद के अधिकारियों की तैनाती को लेकर जारी इस अंदरूनी प्रशासनिक खींचतान का सीधा असर विभागीय कामकाजों और नए अधिकारियों के भविष्य पर पड़ रहा है। वही सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर क्यों बिठाकर विभाग इनको तनख्वाह दे रहा है जबकि विभाग में पद खाली होने और अधिकारियों की कमी सर्वविदित है।

1.5 साल से अटका ESI तबादला, नियमों की हो रही अनदेखी
परिवहन विभाग के नियमानुसार प्रवर्तन अवर निरीक्षकों (ESI) का तबादला प्रत्येक 6 महीने में किया जाना अनिवार्य है। हालांकि, विभागीय शिथिलता और शीर्ष स्तर की अनिश्चितता के कारण पिछले डेढ़ साल से यह प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है। समय पर तबादला न होने से न केवल पुरानी व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि नए अधिकारियों के समायोजन में भी रुकावट आ रही है।

शीर्ष अधिकारियों के विवाद की कीमत चुका रहे नवनियुक्त अधिकारी
विभाग के उच्च अधिकारियों के बीच जारी आपसी खींचतान और नीतिगत फैसलों में हो रही देरी की बड़ी कीमत इन 26 नए अधिकारियों को चुकानी पड़ रही है। प्रशिक्षण पूरा करने और नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद वे बिना किसी जिम्मेदारी के अपनी पहली पोस्टिंग का इंतजार करने को मजबूर हैं। इससे उनके मनोबल और प्रशासनिक कार्यप्रणाली दोनों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

परिवहन व्यवस्था और राजस्व वसूली पर पड़ रहा असर
फील्ड में नए MVI और ESI अधिकारियों की तैनाती न होने तथा पुराने तबादलों के लटके रहने से जमीनी स्तर पर परिवहन व्यवस्था की निगरानी प्रभावित हो रही है। गाड़ियों की फिटनेस जांच, ओवरलोडिंग पर लगाम और अवैध परिचालन रोकने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा है, जिससे राज्य सरकार के राजस्व संग्रह पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।