PATNA : गुप्तेश्वर पाण्डेय बने बिहार के नए पुलिस कप्तान, बिहार की कानून व्यवस्था सँभालने की बड़ी जिम्मेवारी

 

PATNA : आखिरकार नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चल रही तमाम तरह की अटकलों पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ब्रेक लगा दिया है. बिहार सरकार ने बिहार पुलिस के चीफ के लिए 1987 बैच के IPS अधिकारी गुप्तेश्वर पाण्डेय के नाम पर मुहर लगा दी है.अब बिहार पुलिस के नए चीफ 1987 बैच के IPS ऑफिसर गुप्तेश्वर पाण्डेय को बना दिया गया है. हमेशा शानदार प्रदर्शन करने वाले श्री पाण्डेय के सामने अब पुरे बिहार की कानून व्यवस्था को सँभालने की बड़ी जिम्मेवारी है.

1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के नए डीजीपी होंगे. बिहार पुलिस अकादमी एवं बिहार सैन्य पुलिस के डीजी गुप्तेश्वर पांडेय को बिहार का नया DGP नियुक्त किया गया है. वे पूर्व DGP के.एस द्विवेदी की जगह लेंगे. बतौर डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय का कार्यकाल 28 फरवरी 2021 तक होगा. गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर जानकारी दी है. गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले हैं. लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ी जिम्मेदारी गुप्तेश्वर पांडेय को मिली है.

DG BMP के पद पर रहते हुए श्री पाण्डेय ने ‘नशामुक्ति अभियान’ के लिए आन्दोलन की शुरुवात की. पुरे बिहार में घूम घूमकर डेढ़ सौ से ज्यादा सभाएं कर जन-जागरूकता अभियान चलाकर पाण्डेय ने शराबबंदी को एक जन-आन्दोलन का रूप दे दिया.उनके जन-जागरण अभियान का ही कमाल है कि आज हर बिहारी की जुबान पर एक ही नारा है-‘ जय बिहार-जय बिहार, नशामुक्त हो बिहार’

गुप्तेश्वर पांडेय किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उनका पुलिसिंग कैरियर ही मिसाल-बेमिसाल है. पुलिस कप्तान के रूप में भी वे जिस जिले में रहे, अपराधियों में दहशत रही. उनके बारे में यह जगजाहिर है कि गुप्तेश्वर पांडेय की कार्यशैली ही ऐसी है, जिससे वे अपराधियों में दहशत और आम लोगों में कानून के प्रति आस्था पैदा करते हैं.

 

सरकार के लिए कई बार  संकटमोचक साबित हो चुके वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी, पुलिस महानिदेशक श्री  गुप्तेश्वर पांडेय का अपनी पूरी सेवा अवधि में अधिकांश समय पुलिस मुख्यालय से बाहर फिल्ड में ही बिता है. अपने 32 साल के सेवा काल में ज्यादा से ज्यादा समय उनका एक्टिव पुलिसिंग में ही बिता है.

खासकर विधि व्यवस्था संभालने के मामले में इनकी कोई सानी नहीं है. मोतिहारी के तुरकौलिया ,सुगौली, रामगढ़वा से लेकर सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, छपरा, सीवान, कटिहार और वैशाली, यानी जब- जब भीषण सांप्रदायिक तनाव का माहौल उत्पन्न हुआ और स्थिति बेकाबू हुई. तब- तब सरकार ने वहां की स्थिति संभालने के लिए इन्हीं को भेजा. गुप्तेश्वर पांडेय के घटनास्थल पर पहुंचते ही स्थिति काबू में हुई और सरकार ने राहत की सांस ली.

चतरा, बेगूसराय, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, हजारीबाग और नालंदा जैसे जिलों में इनकी बिंदास पुलिस कप्तानी को लोग आज भी याद करते हैं. मुंगेर, बेतिया, मुजफ्फरपुर में डीआइजी रहे और वहां जमकर सोशल इंजीनियरिंग के साथ स्मार्ट पुलिसिंग को अंजाम दिया.

 

बता दें कि इस बार सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के मुताबिक यूपीएससी ने बिहार सरकार से बिहार कैडर के तीन आईपीएस अधिकारियों का नाम मांगा था जिसमें इनका नाम सबसे ऊपर था. अब देखना होगा की वे बिहार में बढ़ते अपराध पर किस तरह से लगाम लगाते हैं.

 

 

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