राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एंव प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की इतिहास की पुस्तक से तीन अध्याय हटा दिए हैं। इनमें से एक अध्याय जातीय संघर्ष से संबंधित भी है। इस अध्याय में जातिय संघर्ष के बीच त्रावणकोर की निचली जाति की नादार महिला के संघर्ष को दर्शाया गया है। जिसे अपने ऊपरी शरीर को खुला रखने के लिए मजबूर किया गया था। ये लोग छाते का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। ना जूते पहन सकते थे और ना ही सोने के जेवर। इस पाठ से संबंधित कोई सवाल भी 2017 में नहीं पूछा गया था।
ये लोग ऊंची जाति के लोगों के सामने अपने शरीर के ऊपर का हिस्सा भी नहीं ढंक सकते थे। लेकिन जब ईसाई मिशनरियों का प्रभाव पड़ा तो इस जाति की महिलाओं ने सिले हुए ब्लाउज पहनना शुरू कर दिया।वहीं पहनावे वाले पाठ में स्वदेशी आंदोलन के बारे में बताया गया है। जिसमें स्वेदेशी पहनावे पर बल दिया गया

माना जा रहा है कि नया शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले ही संशोधित पुस्तकें आ जाएंगी। इससे पहले 2017 में एनसीईआरटी ने 182 किताबों में 1,334 बदलाव किए थे। इन बदलावों में अतिरिक्त जानकारी डालना, डाटा अपडेट और संशोधन करना शामिल था।
जो तीन पाठ हटाए गए हैं उनमें से एक है- पहनावे का सामाजिक इतिहास। पहनावे से संबंधित इस पाठ में बताया गया है कि कैसे सामाजिक आंदोलन पहनावे को प्रभावित करते हैं। दूसरा पाठ है- इतिहास और खेल- क्रिकेट की कहानी।इस पाठ में क्रिकेट के इतिहास और उसका जाति, क्षेत्र और समुदाय की राजनीति से संबंध के बारे में बताया गया है। तीसरा पाठ है- किसान और काश्तकार। इस पाठ में पूंजीवाद के विकास और उपनिवेशवाद ने कैसे किसानों और उनके जीवन को बदल दिया है, इस बारे में बताया गया है।
