परिकर के निधन के बाद से ही इस केंद्र शासित प्रदेश में सियासी उठापटक तेज

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर के निधन के बाद से ही इस केंद्र शासित प्रदेश में सियासी उठापटक तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस यहां अपनी सरकार बनाने का दावा पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा अपनी सरकार बचाने में लगी हुई है। रविवार देर रात परिकर के निधन के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी गोवा गए और वहां उन्होंने विधायकों के साथ बैठक की।

वहीं गोवा के भाजपा प्रमुख का कहना है कि गोवा के मुख्यमंत्री का फैसला सोमवार दोपहर 2 बजे तक ले लिया जाएगा और 3 बजे शपथ दिलाई जाएगी। अपनी सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कांग्रेस के 14 विधायक सोमवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा के पास भी गए।

कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की सोमवार सुबह पणजी में बैठक हुई है। विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावेलकर का कहना है कि राज्यपाल द्वारा अपॉइंटमेंट देने से इनकार करने के बाद पार्टी के विधायकों ने बिन बुलाए राजभवन जाने का फैसला लिया।

कावेलकर का कहना है, “हम सदन में बहुमत वाली पार्टी हैं और अपॉइंटमेंट लेने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।”

कावेलकर का कहना है कि परिकर के निधन के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है इसलिए हम मांग करते हैं कि हमें सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए।

कांग्रेस 14 विधायकों के साथ इस वक्त राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है। वहीं भाजपा के पास 40 सदस्यों वाले सदन में केवल 12 सदस्य हैं। सदन में इस वक्त कुल सदस्यों की संख्या 36 है। बीते साल भाजपा विधायक फ्रांसिस डिसूजा और रविवार को परिकर के निधन के बाद दो सदस्यों की संख्या कम हो गई। बीते साल कांग्रेस के दो विधायकों सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोप्ते ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके चलते अब सदन में 36 सदस्य हैं।

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