
MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : वर्ष 2013 के चर्चित छात्र जदयू नेता शमीम खान की हत्या में दोषी करार देते हुए एडीजे-9 वीरेंद्र कुमार की अदालत ने कुख्यात अनिल ओझा और उसके साथी रामकुमार को उम्रकैद की सजा मुक़र्रर की, इसके साथ ही दोनों अभियुक्तों पर न्यायालय द्वारा 10-10 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है.
गौरतलब हो की इस मामले में न्यायलय ने गत 27 अप्रैल को कुख्यात अनिल ओझा और रामकुमार को दोषी पाते हुए सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए गुरुवार 2 मई की तिथि मुक़र्रर की थी. इस मामले में राम कुमार झा जमानत पर था. दोष सिद्ध होते ही उसे गिरफ्तार कर अनिल ओझा के साथ ही जेल भेज दिया गया था. वहीं कांड के अन्य आरोपी पूर्व वार्ड पार्षद संजय पासवान, रोशन कुमार, शंभू सिंह और बबन देव कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था.

आपको बता दें की एक अगस्त 2013 की संध्या विवि परिसर में परीक्षा हॉल के पास शमीम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. छात्र नेता शमीम पत्नी व बेटे के साथ मोटरसाइकिल पर बाजार से ईद की खरीदारी कर विवि परिसर स्थित अपने घर लौट रहा था. अपराधियों ने पत्नी व बेटे के सामने गोली मारकर शमीम की हत्या कर दी थी. हत्या के बाद विश्वविद्यालय में भारी बवाल हुआ था, जिसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष सुरेंद्र मिश्र को निलंबित भी कर दिया गया था.

छात्र नेता शमीम हत्याकांड में मृतक के पिता सेवानिवृत्त विवि कर्मी अब्दुल रहीम ने विवि थाने में एक अगस्त 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी. दर्ज प्राथमिकी में उन्होंने खबड़ा निवासी अनिल ओझा को हत्याकांड का मुख्य आरोपी बनाया था. वहीं विवि कैंपस निवासी रामकुमार झा को दूसरा आरोपी बनाया गया था. पुलिस अनुसंधान के क्रम में पुलिस ने खबड़ा निवासी शिवेन्दु पराशर, बबन देव कुमार, छपरा के अमनौर निवासी शंभू सिंह व पूर्व वार्ड पार्षद संजय पासवान को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया था.

अनिल की गिरफ्तारी नहीं होने पर शमीम के परिजनों ने एक बार आत्मदाह का भी प्रयास किया था. शमीम हत्याकांड के बाद लम्बी अवधि तक आरोपी अनिल ओझा के पुलिस गिरफ्त में नहीं आने से दहशत में आए शमीम के परिजन सिवान के दरौली स्थित अपने पैतृक गांव चले गए थे. 22 मार्च 2018 को हत्याकांड की चश्मदीद गवाह शमीम की पत्नी तबस्सुम परवीन और शिक्षिका बहन तराना खानम को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच गवाही के लिए सीवान से मुजफ्फरपुर लाया गया था.

दोनों चश्मदीद गवाहों के अलावा स्वतंत्र साक्षी नीरज कुमार, धर्मेंद्र ओझा आदि ने भी अनिल ओझा के खिलाफ गवाही दी थी. गवाहों के बयान व जांच के दौरान घटनास्थल से मिले पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर न्यायलय में दोनों को दोषी साबित करने में मदद मिली है. कोर्ट में स्पीडी ट्रायल शुरू होने के बाद मृतक शमीम की पत्नी, बहन, चश्मदीद गवाहों, केस के दोनों आईओ, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर आदि का बयान पूर्व में ही दर्ज हो चुका था.

अनिल ओझा पर सदर थाने क्षेत्र व विवि थाने में धारा 420, 467, 504, 120 बी, 34 एवं आर्म्स एक्ट के अलावा दर्जनों धाराओं में कई मामले दर्ज है. इसके अलावा उसके खिलाफ विश्वविद्यालय थाना, काजीमोहम्मदपुर थाना व रेल थाना समेत कई थानों में भी लगभग दो दर्जन मामले दर्ज हैं. इनमें हत्या के कुल तीन था आर्म्स एक्ट के आधा दर्जन मामले शामिल हैं. अनिल ओझा को पानीटंकी चौक पर मिठनपुरा थाने के दारोगा अजय कुमार यादव और टाइगर मोबाइल के जवान रवींद्र कुमार ने 29 नवंबर 2016 को नशे की हालत में गिरफ्तार किया था.
पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ था कि छात्र नेता शमीम की हत्या विवि के टेंडर व वर्चस्व में अपना अधिपत्य ज़माने की मंशा रखने वाले अनिल ओझा का मुखर होकर विरोध करना मुख्य वजह थी. इसी कारण अनिल ओझा ने रास्ते का रोड़ा बने विरोधी शमीम की हत्या करने का फैसला कर लिया था. एक अगस्त 2013 को हत्याकाण्ड से पहले अनिल ओझा और उसके गुर्गे अनिल ओझा की पत्नी संगीता ओझा के नाम से आवंटित विवि के कम्युनिटी हॉल में जुटे और जमकर शराब पी. जैसे ही शमीम मोटरसाइकिल से पहुंचा आरोपियों ने उसकी पत्नी और उसके तीन वर्षीय पुत्र के सामने ही उसे घेर कर गले के पास गाेली मार दी, जिससे मौके पर ही शमीम ने दम तोड़ दिया था.
