गुवाहाटी. तिब्बत के एक गांव में भूस्खलन के बाद पहाड़ी का एक हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी में गिर गया। घटना 16 अक्टूबर को हुई। इससे चीन में नदी का पानी रुक गया है और कृत्रिम झील बन गई है। पहाड़ से गिरी चट्टानों के कारण कृत्रिम झील में अस्थाई बांध बन गया है, जिसके टूटने पर तिब्बत से सटे अरुणाचल प्रदेश में भारी बाढ़ आने की आशंका है। राज्य के पूर्वी सियांग इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया है। अरुणाचल के कांग्रेस सांसद निनोंग एरिंग ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से इस मामले में दखल देने की अपील की है।
चट्टानें हटने पर अचानक बढ़ेगा जलस्तर
चीन की यारलुंग सांगपो नदी को तिब्बत से अरुणाचल में प्रवेश के बाद सियांग कहा जाता है। यही सियांग असम में प्रवेश के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है। भूस्खलन के चलते अरुणाचल में सियांग का जलस्तर कम हो गया है। आशंका है कि अगर ब्रह्मपुत्र में गिरी चट्टानें हटेंगी तो अचानक जलस्तर बढ़ेगा और अरुणाचल में बाढ़ आएगी।
भूस्खलन के चलते अरुणाचल में सियांग नदी में जलस्तर कम हो गया है। आशंका है कि अगर भूस्खलन के चलते ब्रह्मपुत्र में गिरे पत्थर हट जाते हैं तो अरुणाचल में भीषण बाढ़ आ सकती है।
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिस इलाके में कृत्रिम झील बनी है, वहां से 6000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। चीन ने कहा कि हमने भारत को इस संबंध में जानकारी दे दी है। चीन के अधिकारियों ने कहा कि यह झील मेनलिंग काउंटी गांव के पास बनी। अब इसका जलस्तर 131 फीट तक पहुंच गया है।
कांग्रेस सांसद का दावा- सूख गई नदी
सांसद निनोंग ने कहा- ब्रह्मपुत्र आैर उसकी सहायक नदियों में जलस्तर तेजी से घट रहा है। सियांग करीब-करीब सूख चुकी है। यह अप्राकृतिक है। अगर भूस्खलन के कारण बना प्राकृतिक डैम टूटा तो भीषण बाढ़ आ सकती है। अरुणाचल के अलावा दूसरे राज्यों में भी इसका असर पड़ सकता है।
अपर सियांग जिले के डिप्टी कमिश्नर डुली कामडुक ने भी बताया कि हमें केंद्रीय जल आयोग से तिब्बत में भूस्खलन की खबर मिली। अरुणाचल के तूतिंग इलाके में सियांग नदी का जलस्तर दो मीटर तक घट गया है।
चीन के अधिकारियों के मुताबिक, जिस इलाके में यह कृत्रिम झील बनी है, वह भारतीय सीमा से 100 किलोमीटर दूर है। साल 2000 में भी ब्रह्मपुत्र से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने की वजह से अरुणाचल और बाकी पूर्वोत्तरी राज्यों में बाढ़ आ गई थी।