जदयू ने गुरुवार को लोकसभा में तीन त’लाक बिल का वि’रोध किया। घोषणा की गई है कि जदयू राज्यसभा में भी इस बिल का वि’रोध करेगा। भाजपा के लिए महत्वपूर्ण तीन तला’क बिल का वि’रोध करने के चलते भाजपा-जदयू के रिश्ते में ख’टास की आशं’का जाहिर की जा रही है। पार्टी के बड़े नेता इस आ’शंका को पूरी तरह खा’रिज करते हैं। उनका कहना है कि वि’वादास्पद मु’ददों पर वि’रोध के बावजूद दोनों दलों की दोस्ती का’यम रहेगी।

हम कुछ नया नहीं कर रहे हैं। पार्टी अपने पुराने स्टैंड पर कायम है। यह पहला मौका नहीं है, जब जदयू और भाजपा के बीच का म’तभेद संसद के भी’तर और बाहर उजागर हुआ है। जदयू ने साफ कहा है कि वह एक स्वतंत्र राजनीतिक दल की तरह व्यवहार करेगा। दोनों की दोस्ती सुशासन के इकलौते एजेंडे पर टिकी है।
इससे इतर राजनीतिक मु’ददों पर दोनों के बीच संयोग से ही किसी मु’द्दे पर एकता कायम हो पाती है। दोनों दलों के बीच सुशासन पर बनी समझदारी का मॉडल बिहार है।
साझा सरकार चल रही है। लेकिन, जदयू के घोषणा-पत्र के किसी हिस्से को लागू करने पर भाजपा ने कभी ए’तराज नहीं किया।
मा’लूम हो कि दोनों दलों की अल्पसंख्यक संबंधी नीति अलग-अलग है। लेकिन, सरकारी नीतियों को लागू करने के माम’ले में दोनों के बीच कभी म’तभेद नहीं हुआ।


Input: Jagran