आपने कभी सोंचा है कि भगवान विष्णु साँपों के बिस्तर पर क्यों सोते हैं? देखें…

आपने अनेक चित्रों, फिल्मों और फोटो में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतार देखे होंगे। किसी में वे गरुड़ (पक्षियों के राजा) की सवारी करते हुए दिखते हैं; किसी चित्र में वे ‘शंख, चक्र, गदा, पदम् के साथ दिखाई देते हैं और कई चित्रों में वे आपने उन्हें साँपों के बिस्तर पर लेटे हुए देखा होगा। साँपों के इस बिस्तर को ‘अनंत-शैय्या’ कहा जाता है।भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों में उन्हें कई सिरों वाले बड़े सर्प के साथ दिखाया जाता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार इस विशाल सर्प को शेषनाग कहा जाता है और भगवान विष्णु इस पर आराम करते हैं। इस चित्रण का कुछ महत्व है।शास्त्रों में भगवान विष्णु के बारे में लिखा है कि – “शान्ताकारं भुजगशयनं”। इसका अर्थ यह है कि भगवान विष्णु शांत भाव से शेषनाग पर आराम कर रहे हैं। भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर प्रत्येक व्यक्ति के मन में यह प्रश्न उठता है कि सर्पों के राजा के नीचे बैठकर कोई इतना शांत कैसे रह सकता है?

इसका तुरंत उत्तर यह आता है कि वे भगवान हैं और उनके लिए सब कुछ संभव है। विष्णु के पास कई अन्य शक्तियां और राज़ हैं जो आपको आश्चर्यचकित कर सकते हैं।जीवन का प्रत्येक क्षण कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से संबंधित होता है। इनमें से परिवार, सामाजिक और आर्थिक कर्तव्य सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

हालाँकि इन कर्तव्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को बहुत प्रयास करना पड़ता है तथा अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जो काल रूपी शेषनाग के समान डरावनी होती हैं तथा इसके कारण चिंता उत्पन्न होती है। भगवान विष्णु का शांत चेहरा ऐसी कठि’न परिस्थितियों में हमें शांत रहने की प्रेरणा देता है। स’मस्याओं का समा’धान शांत रहकर ही सफलतापूर्वक ढूँढा जा सकता है।

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