अमृतसर. दशहरे के दिन जोड़ा फाटक पर हुए ट्रेन हादसे को लेकर लोको पायलट ने बयान दिया था कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने गाड़ी पर पथराव किया था। जिसके बाद वह ट्रेन में बैठे पैसेंजर की सुरक्षा को देखते हुए धीरे-धीरे ट्रेन को आगे बढ़ाता रहा। जबकि चश्मदीद इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ड्राइवर सरासर झूठ बोल रहा है। ऐसा कुछ नहीं हुआ था, ट्रेन तेज रफ्तार से वहां से गुजरी थी। शुक्रवार को हुए इस हादसे में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 62 हो गया है, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हैं।
क्या था ड्राइवर का बयान ?
– लोको पायलट अरविंद ने अपने स्टेटमेंट में बताया, ‘मैंने 19 अक्टूबर को शाम 5 बजे ट्रेन नंबर डीपीसी 11091 का चार्ज लिया और जालंधर के प्लेटफॉर्म 1 से 5:10 पर लेकर चला। शाम 6:44 बजे मानांवाला पहुंचकर 6:46 बजे येलो सिग्नल और ग्रीन सिग्नल मिलने पर अमृतसर के लिए चला। मानांवाला और अमृतसर के बीच गेट सं. 28 का डिस्टेंट और गेट सिग्नल ग्रीन पास किया। इसके बाद गेट सं. 27 के अंतराल और दोनों गेट सिग्नल को डबल येलो में लगातार हॉर्न बजाते हुए पास किया।’
– घटनास्थल पर पहुंचने की स्थिति पर अरविंद का कहना है, जैसे ही ट्रेन केएम नंबर 508/11 के करीब पहुंची तो सामने से गाड़ी सं. 13006 डीएन आ रही थी। अचानक लोगों का हुजूम ट्रैक के पास दिखाई दिया, तो मैंने तुरंत हॉर्न बजाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर भी मेरी गाड़ी की चपेट में कई लोग आ गए। गाड़ी की स्पीड लगभग रुकने के करीब थी तो बड़ी संख्या में लोगों ने मेरी गाड़ी पर पथराव शुरू कर दिया। मैंने मेरी गाड़ी में बैठी सवारियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन को आगे बढ़ाया और होम सिग्नल की स्थिति में अमृतसर स्टेशन पर आ गया। इसकी सूचना मैंने सभी संबंधित अधिकारियों को भी दे दी।’
चश्मदीदों का क्या कहना है?
– अमृतसर के वार्ड नंबर 46 के पार्ष शैलेंद्र सिंह शली का कहना है, मैं तब घटनास्थल पर ही था। ट्रेन रोकना तो दूर उसकी स्पीड भी कम नहीं हुई ।
– उन्होंने कहा, क्या लॉजिकली ऐसे में हमारे लिए ट्रेन पर पत्थर फेंकना मुमकिन है। वो भी तब जब हमारे आसपास मृत और जख्मी लोग पड़े हों। पायलट झूठ बोल रहा है।
– हम केवल लोगों की चीखें ही सुन सकते थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घटनास्थल मोहकमपुरा पुलिस थाना क्षेत्र में है। वहां के एसएचओ सुखमिंदर सिंह का कहना है कि जहां तक उनकी जांच में पता चला है कि ट्रेन के गुजरने के दौरान किसी तरह का पथराव नहीं हुआ था।
– वहीं, मौके पर मौजूद परमजीत सिंह का कहना है, ट्रेन इतनी तेज रफ्तार में थी कि कुछ ही सेकंड में हादसा हो गया। इंटरनेट पर सैकड़ों वीडियो हैं जिनसे पता चलता है कि ट्रेन कितनी स्पीड से गुजरी थी।
– ऐसा लगा कि लोको पायलट तो हमें भी कुचलते हुए निकल जाता। सेकंडों में ट्रेन हमारे पास से गुजर गई।
कैसे हुआ हादसा ?
– शुक्रवार की शाम ये हादसा जोड़ा फाटक के पास पुराने धोबी घाट के पास हुआ। शाम करीब 6.30 बजे सैकड़ों लोग ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। इसी दौरान पहले पठानकोट-अमृतसर डीएमयू और फिर हावड़ा मेल ने 250 लोगों को कुचल डाला। जिससे 62 लोगों की मौत हो गई। मेले में करीब 4000 लोग मौजूद थे।
– बताया जा रहा है कि ग्राउंड में जगह कम होने से सैकड़ों लोग पटरी पर खड़े थे। इसी बीच 6:50 पर जालंधर की ओर से लाइन नंबर 3 पर डीएमयू तेजी से आई और लोगों को काटते हुए निकल गई। हादसे से लोग संभल पाते, तभी दूसरे ट्रैक पर एक और ट्रेन आ गई।