नीतीश सरकार ईंट-भट्ठों को लेकर बैकफुट पर

PATNA : सूबे में पुरानी तकनीक से चलने वाले ईंट-भट्ठों पर सरकार की रोक के बाद बिहार में जारी संचालको के आंदोलन के आगे सरकार झुक गई है.सरकार ने फैसला लिया है कि तकनीक के अपग्रेडेशन के लिए शपथ पत्र के साथ अनुमति मिल गई है. पर्यावरण विभाग ने  ईंट-भट्ठों के संचालन के लिए नई स्वच्छ तकनीक को अपनाना अनिवार्य  कर दिया गया था कि जिसके बाद राज्य भर के संचालको ने सरकार कि नई निति का विरोध कर दिया था. गौरतलब हो कि सितंबर महीने में पर्यावरण व वन विभाग तथा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद डिप्टी सीएम ने नई निति कि अनिवार्यता तय कर दी थी.

 

राज्य में करीब 6500 ईंट-भट्ठे चल रहे हैं, इसमें से 1700 भट्ठों के संचालकों ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को शपथ पत्र देकर कहा है कि अगले एक साल में नई तकनीक में परिवर्तित कर लिया जाएगा जिसमे 1100 भट्ठे नई स्वच्छता तकनीक पर काम कर रहे हैं.  पुरानी तकनीक वाले ईंट-भट्ठों से एक लाख ईंट तैयार करने में 20 टन कोयले की खपत होती है, जबकि नई स्वच्छता तकनीक अपनाने के बाद 12 टन कोयले से एक लाख ईंट बनाए जाएंगे.  इस तकनीक में कार्बन उत्सर्जन कम होने से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण होने कि बात कही जा रही है.

 

पटना के निकटवर्ती पांच प्रखंडों मनेर, दानापुर, पटना सदर, फतुहा और फुलवारीशरीफ में नया ईंट-भट्ठा लगाने पर रोक है.  डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक वायु प्रदूषित 10 शहरों में बिहार के पटना, गया और मुजफ्फरपुर भी शामिल हैं. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पुरानी तकनीकी पर आधारित ईंट-भट्ठों के परिचालन की अनुमति देने पर रोक लगा रखी है.

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