वीरता के कई किस्से आपने सुने होंगे, मगर सैनिक की श’हादत के बाद वी’रांगाना को जिस तरह से जनसहयोग देकर उनकी जरूरत को पूरा किया है यह वाकई का’बिले तारीफ है। इस कहानी के दो किरदार हैं पहला मध्यप्रदेश के एक वीर सैनिक की श’हादत के बाद उनकी पत्नी के जर्ज’र मकान को जिस तरह से मिलकर ठीक करवाया गया। इसकी जितनी भी तारीफ की जाए यह कम ही होगी।
इतना ही नहीं जब वह वीरांगना घर में प्रवेश के लिए द्वार पर खड़ी हुईं तब गांव के युवाओं ने अपनी हथेली जमीन पर बिछा दी और वह पांव बिना जमीन पर रखे अंदर प्रवेश कर गई। वहीं कहानी के दूसरे किरदार बिहार के हैं। यहां एक गरुड़ कमांडो आ’तंकियों से लोहा लेने के बाद शहीद हो गया था। बहन की शादी में उनकी पूरी यूनिट आ गई और हर रश्मों रिवाज को बखूबी निभाया ही नहीं, बल्कि उसे अपनी हथेलियों पर विदा किया। दोनों की तस्वीरें आपके दिल को छू लेने वाली हैं।
