श’र्मनाक घ’टना; दहेज में बाइक नहीं देने पर पत्नी की बे’रहमी से की पि’टाई और ससुराल से निकाल दिया, देखें…

सरकार दहेज लेन देन को लेकर सख्त कानून बनाया है पर जमीनी सच्चाई ये भी है कि बिना दहेज के एक भी शादी नहीं हो रही है , ये अलग बात है कि तरीके बदल गये हैं , यही कारण है कि दहेज कि डिमांड पर आए दिन नवविवाहिता प्र’ताड़ित होती रही है लेकिन दु’ख कि बात ये है कि पी’ड़िता का द’र्द कानून के नुमाइंदे भी सुनने को तैयार नहीं पैसे और पहुंच के आगे कानून कि किताब को अमल करने वाले भी उ’दासीन हो जाते हैं.

कुछ ऐसी ही कहानी रम्भा कि है. ये मा’मला सदर थाना क्षेत्र के अमठो गांव का है जहां एक पिता ने अपनी बेटी रम्भा कुमारी कि शादी अपने हैसियत के मुताबिक बड़े ही धूमधाम से किया बताया कि काफी ज’द्दोजहद के बाद नकद सवा दो लाख रुपए दहेज देकर परसौनी के मुकेश मुखिया से 22 फरवरी को शादी सम्पन्न हुई , जिसके बाद रम्भा अपने ससुराल गयी आ’रोप है कि ससुराल में शादी के कुछ ही दिनों के बाद रम्भा से दहेज में बाइक का डिमांड किया जाने लगा लेकिन रम्भा अपनी पिता कि हैसियत देख बाइक लाने से इनकार करती रही आरोप है की इसी बात को लेकर रम्भा के साथ उसके ससुराल वाले लगातार मा’रपी’ट करने लगे जिस बात को लेकर रम्भा के पिता गिजेन मुखिया भी रम्भा के ससुराल जाकर कई बार ग्रामीण स्तर पर पंचायत किया और आमद होने पर बाइक देने का आ’श्वासन भी दिया.

लेकिन ये बात बेटी के ससुराल वालों को नागवार गुजरा और आरोप है कि एक बार तो पंच के सामने में ही रम्भा और उसके पिता कि भी पि’टायी कर दी गयी थी. प्र’ताड़ना का खेल बदस्तूर जारी रहा इस बीच फिर ससुराल वालों ने रक्षा बंधन के दिन रम्भा को बेरहमी से पीटा और इस बार घर से भी भगा दिया किसी तरह रम्भा घा’यल अवस्था में अपने नैहर अमठो पहुंची जहां गिजेन मुखिया द्वारा सदर अस्पताल में बेटी का इ’लाज करवाया जिसके बाद रम्भा ने न्याय के लिए महिला थाने में आवेदन देकर गुहार लगायी. पी’ड़िता के परिजन का का कहना है कि उसके द्बारा महिला थाना में दिए गये आवेदन को करीब एक सप्ताह बीत गया पर आज तक मा’मला दर्ज नहीं हो सका है ना ही इस मामले में कोई का’र्रवाई हुई है जिससे ससुराल वालों का हौसला बु’लंद है.

ऐसे में पीड़िता सहित परिवार वाले गहरे सदमे में है बताया तो ये भी गया है कि कहने पर समुचित औपचारिकता भी किया गया बावजूद मामला दर्ज नहीं होने से पी’ड़िता मर्मा’हत है और कहीं से भी न्याय पाने कि सारी उम्मीद भी उसकी खत्म होती नजर आ रही है , वही इस बाबत महिला थानाध्यक्ष कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से परहेज कर रही है.

अब सवाल उठता है कि एक पीड़ित जिसका परिवार महज एक बाइक के लिए टू’ट रहा है उसे प्रताड़ित किया जा रहा है ससुराल से भगा दिया गया है वो भी महज एक बाइक के लिए ऐसे में कानून तो बाद कि चीज है संवेदना के दो बोल भी अगर कानून के नुमाइंदे नहीं बोल सकते ससुराल के द्बारा दिए गये अनगिनत घाव पर थोड़ी सी मरहम भी नहीं लगा सकते हैं तो फिर क्या होगा उस कानून का जिसे सरकार ने बड़े ही फक्र से लागू किया है की दहेज लेना अ’पराध होगा , इस मा’मले से तो लोग यही कह रहे हैं कि यहां तो दहेज लेने वालों की चाकरी होता प्रतीत हो रहा है वर्ना एक सप्ताह के बाद भी दहेज लो’भियों के वि’रुध क’रवाई जरूर होती.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading