स्थानीय होटल में हुए इस आयोजन में पटना स्मार्ट सिटी के अलावा भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ और रांची के सीईओ व प्रबंध निदेशक मौजूद रहे। समय सीमा तय हो जाने के बाद भागलपुर और मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि कुल लागत के अनुपात में स्वीकृत कार्यों की टेंडर प्रक्रिया में भागलपुर सबसे फिसड्डी है। पटना फिलहाल इस मामले में सबसे आगे है। हालांकि लक्ष्य के हिसाब से बिहार के चारों शहर अभी पीछे चल रहे हैं।
पहले सभी शहरों ने बारी-बारी से प्रेजेंटेशन दिए। बताया कि चयनित कार्यों के सापेक्ष अब तक की क्या प्रगति है। भागलपुर पहले चरण के फास्ट ट्रैक राउंड में और मुजफ्फरपुर दूसरे राउंड में स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित हुआ था। ऐसे में इन्हें मार्च 2020 तक सारे काम शुरू कराने होंगे। वहीं पटना और बिहारशरीफ के पास सभी काम शुरू कराने की समय सीमा जून 2020 तक है. स्मार्ट सिटी के मिशन निदेशक सह संयुक्त सचिव कुणाण कुमार ने कहा कि सिर्फ शहरों को स्मार्ट बनाने से काम नहीं चलेगा।
पब्लिक को स्मार्ट बनाइए। यदि आप लोगों ने जनता की सोच को स्मार्ट बना दिया तो सिटी अपने आप स्मार्ट हो जाएंगी। दो टूक कहा कि स्मार्ट सिटी की सारी प्लानिंग में हर हाल में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करें। बैठक में बिहार-झारखंड की स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित शहरों की समीक्षा की गई।


