#JHARKHAND #INDIA : झारखंड में नया राशन कार्ड परिवार की महिला मुखिया के नाम बनेगा। कार्ड में पहले परिवार की महिला मुखिया का नाम दर्ज होगा, उसके बाद घर के अन्य सदस्यों के नाम डाले जाएंगे। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए खाद्य-आपूर्ति विभाग ने नई नियमावली बना ली है। विभाग इसे कैबिनेट में भेजने की तैयारी में जुटा है। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही नए राशन कार्ड के लिए पुरुषों को आवेदन देने की अनुमति नहीं मिलेगी। विभाग ने बताया कि इस नई व्यवस्था से महिलाओं को सबल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्य में अब तक के नियम के अनुसार महिला या पुरुष कोई भी सदस्य राशन कार्ड के लिए आवेदन दे सकते हैं। कार्ड बनाने के लिए महिला सदस्य की प्राथमिकता पर कोई पाबंदी नहीं है। फिलहाल सूबे में 57.12 लाख परिवारों के पास राशन कार्ड है। सबसे ज्यादा रांची में 4.63 लाख राशन कार्डधारी मौजूद हैं।महिला सदस्य न होने पर पुरुषों को करना होगा स्त्यापन : परिवार में महिला सदस्य के नहीं रहने पर पुरुष सदस्य को यह सत्यापित करना होगा कि उनके घर में कोई महिला सदस्य नहीं है। इसकी जांच जिला स्तर पर जिला डीएसओ करेंगे और उसके बाद ही पुरुष सदस्य के नाम से राशन कार्ड बनेगा। जांच में यह भी देखा जाएगा कि आवेदक सही मायने में राशन कार्ड लेने का हकदार है या नहीं। उसके बाद ही उनके परिवार को राशन कार्ड दिया जाएगा। परिवार में अगर महिला प्रधान सदस्य नहीं है और उस परिवार में किसी युवती की उम्र 18 वर्ष से ऊपर है तो उसके नाम पर कार्ड बनाया जा सकेगा।

आधार नहीं होने पर देना होगा सर्टिफिकेट : राशन कार्ड में मौजूद सभी सदस्यों का आधार कार्ड होना जरूरी है। यदि किसी सदस्य के पास आधार संख्या नहीं है तो उसे डीएसओ को आधार नहीं होने का प्रमाण पत्र देना होगा। इसके बाद ही उस सदस्य के हिस्से का राशन मिल पाएगा। साथ ही विभिन्न योजनाओं से राशन कार्ड का इस्तमाल किया जा सकेगा।

उज्ज्वला योजना में महिलाओं के नाम से ही मिलता है गैस कनेक्शन : पहले उज्ज्वला योजना में ऐसी व्यवस्था थी कि सिर्फ महिलाओं के नाम ही एलपीजी कनेक्शन मिलेगा। अब राशन कार्ड में भी ऐसी ही व्यवस्था की जाएगी। उज्ज्वला योजना में पुरुषों के लिए कोई प्रावधान नहीं बनाया गया है। जिन घरों में महिला नहीं है वहां पुरुषों को गैस कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। उज्जवला योजना में जिस साफ्टवेयर का प्रयोग किया जा रहा है उसमें पुरुष की जगह भरने का कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही नहीं बनायी गई है।