भोजपुरी गायक राजू सिंह ने ‘मी टू’ अभियान का समर्थन करते हुए आवाज उठाने वाली महिलाओं की हिम्मत की सराहना की

धनबाद, । फिल्म अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के नाना पाटेकर पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाने के बाद भारत में भी ‘मी टू ‘ अभियान ने जोर पकड़ लिया है। इसके बाद न सिर्फ फिल्म उद्योग बल्कि पत्रकारिता व राजनीतिक जगत में भी कई लोगों पर इस तरह के आरोप लगने शुरू हुए और कई महिलाओं ने अपने साथ हुए इस तरह के दुव्र्यवहार की शिकायतें खुलेआम की।’मी टू’ विषय पर आयोजित विमर्श में चर्चित भोजपुरी गायक राजू सिंह अनुरागी ने इस अभियान का समर्थन करते हुए आवाज उठाने वाली महिलाओं की हिम्मत की सराहना की।

अनुरागी ने कहा कि कला जगत का आकर्षण शुरू से रहा है। इसी आकर्षण से लोग खिंचे चले आते हैं। हर किसी में नाम-दाम कमाने की इच्छा होती है। स्टारडम की चाह होती है। लेकिन इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि कई बार महिलाओं को ये सब पाने के लिए बहुत कुछ ऐसा करना होता जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की होती है। कई बार तो सब कुछ खोकर भी उपलब्धि के नाम पर उनके पास कुछ नहीं रहता। तब उन्हें अहसास होता है कि उनका सिर्फ इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में वह शोषण के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। यह सही भी है, ऐसा होना भी चाहिए। इस अभियान से आगे लोग इस तरह की घटनाएं करने से पहले सोचने को विवश जरूर होंगे। इस अभियान को अंजाम तक पहुंचना चाहिएः विमर्श के दौरान सवाल उठा कि शोषण के इतने दिनों बाद कहीं से फिर से चर्चित होने का हथकंडा तो नहीं? राजू का कहना था कि समय के साथ सभी महिलाएं घर-परिवार बसा चुकी हैं। सिर्फ चर्चित होने के लिए अपने अतीत से अनभिज्ञ परिजनों के बीच खुद को शर्मिंदा क्यों करेंगी? यह दरअसल उनका ऐसा गम होता है जो उन्हें वर्षों से सालता रहता है। जबकि शोषक सफेदपोश बने रहते हैं। इन दिनों तकनीक भी सोशल मीडिया के सहारे महिलाओं की मदद कर रहा है लिहाजा बहुत ही हिम्मत के साथ वे इज्जत का लबादा ओढ़े ऐसे लोगों का नकाब उतार रही हैं। उनकी इस हिम्मत को दाद दीजिए। एक बात यह भी है कि आज ये महिलाएं एक मुकाम पर हैं तभी हम और आप इनकी बात को तवज्जो दे रहे हैं। शुरुआत में ही पीछे हट जाने या शोर मचाने पर उनकी सुनता ही कौन?

सरकार करे फंड की व्यवस्था : अनुरागी के मुताबिक फिल्मों, सीरियल या एलबम में पैसा लगानेवाले सेठ मनमर्जी करते हैं। कला में उनकी रुचि नहीं होती बल्कि वह सिर्फ ऐश करने ही आते हैं इसलिए शोषण होता है। सरकार इस क्षेत्र को फंड मुहैया कराए तो शोषण पर काफी हद तक रोक लग सकता है।

फूहड़ता को नापसंद करें लोग : राजू का मानना था कि तात्कालिक लोकप्रियता के लिए कलाकार भी फूहड़ता का सहारा लेते हैं। लोग उन्हें पसंद भी करते हैं। ऐसे ही लोग कला जगत में शोषण करते भी हैं और उसका शिकार भी होते हैं। लोग पसंद करना बंद कर दें तो इस तरह की घटनाएं कम होंगी। शारदा सिन्हा, भरत शर्मा, मनोज तिवारी के स्तर पर काम हो तो न सिर्फ भोजपुरी गीत कालजयी हों बल्कि उस माहौल में शोषण को जगह ही न मिले।

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