
SIWAN : सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब से नहलाकर चंदा बाबू के दो बेटों की हत्या करने के मामले में सीवान के डॉन और चार बार सांसद रह चुके मोहम्मद शहाबुद्दीन और उसके तीन सहयोगियों को हाई कोर्ट से मिली उम्र कैद की सजा बरकरार रखी. एसिड अटैक के नाम से चर्चित इस हत्याकांड में शहाबुद्दीन ने रंगदारी नहीं देने पर चंदा बाबू के दो बेटों को एसिड नहलाकर मार दिया था. सोमवार को इस मामले की सुनवाई होते ही चीफ जस्टिस रंजग गोगोई की पीठ ने महज कुछ मिनटों में ही शहाबुद्दीन की याचिका खारिज कर दी.
साल 2004 में हुई हत्या की दोहरी वारदात ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया था. यही वो साल था जब सीवान में साहेब यानि डॉन शहाबुद्दीन की कोठी पर हैवानियत का नंगा नाच हुआ था. 16 अगस्त 2004 को सीवान के ही व्यवसायी चंदा बाबू के दो बेटों गिरीश कुमार और सतीश कुमार का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी.

आरोप था कि दोनों को शहाबुद्दीन के गांव प्रतापपुर ले जाकर उन्हें शहाबुद्दीन की ही कोठी में तेजाब से नहलाया गया जिससे उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई. मामले में नया मोड़ तब आया जब इसी कांड के चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की भी 16 जून 14 को सीवान के डीएवी मोड़ पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
अपने तीनों बेटे की मां और व्यवसायी चन्दकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू की पत्नी कलावती देवी ने इस मामले में मुफस्सिल थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. इस घटना पांच साल बाद 2009 में सीवान के तत्कालीन एसपी अमित कुमार जैन के निर्देश पर केस के आइओ ने शहाबुद्दीन, असलम, आरिफ व राज कुमार साह को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया था. केस की सुनवाई आगे हुई और इस मामले में पहले लोकल कोर्ट, फिर हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट.

घटना 16 अगस्त 2004 की है जब सुबह करीब 10 बजे आफताब,झब्बू मियां, राजकुमार शाह, शेख अशलम, मोनू उर्फ सोनू उर्फ आरिफ हुसैन, मकसूद मियां समेत कुछ अन्य लोग चंदा बाबू की दुकान पर पहुंचे। वहां चंदा बाबू के बेटे राजीव रोशन, सतीश राज मौजूद थे। उन्होंने सभी को चाय पिलाई। इस दौरान 2 लाख रुपए की मांग की गई। जिस पर राजीव ने कहा कि वो थोड़ा बहुत दे सकते हैं लेकिन 2 लाख नहीं। यह बात राजीव ने कही थी कि तुरंत आफताब और झब्बू मियां ने राजीव को थप्पड़ मार दिया।

इसके बाद उनके बाकी साथियों ने भी राजीव को मारना शुरू कर दिया। इस दौरान सतीश ने अपने भाई को पिटता देख अपनी ही दुकान की गोदाम में रखी एसिड की बोतल लाया और एक मग में उड़ेल कर बाहर मार पीट कर रहे लोगों पर उछाल दिया। एसिड के छीटें पड़ते ही राजीव दबंगों की चंगुल से भागा और बगल की एक दुकान में छिप गया लेकिन उनके सतीश उन लोगों की पकड़ में आया जिसे वो लोग उठा ले गए। इसके बाद राजीव के भाई गिरीश को भी बाइक पर बिठा कर दबंग लेकर चले गए। इतना ही नहीं थोड़ी देर बाद जब राजीव दुकान के बाहर निकला तो उसे भी पकड़ लिया गया।

फिर शहाबुद्दीन सलाखों से बाहर आया और अपने घर में ही गिरीश और सतीश को तेजाब से नहला कर मार डाला गया। वो दोनों जल राख हो गए और राजीव सब कुछ देखता रहा। राजीव को इसलिए जिंदा रखा गया ताकि चंदा बाबू के आने पर उनसे रजिस्ट्री कराई जाए और फिर पूरे परिवार को मार दिया जाए। लेकिन राजीव को यह पता चल गया और वो देर रात भाग निकलने में कामयाब हो गया। फिर वो कुछ समय तक यूपी के पडरौना और कुशीनगर में रहा। वो वापस आया और उसकी शादी भी हुई। हालांकि राजीव पर शहाबुद्दीन की नजर थी और उसकी भी हत्या 16 जून 2014 को कर दी गई। इसके बाद घर में फिर से मातम फैल गया।

बीते साल सितंबर में शहाबुद्दीन सीवान जेल से बाहर आने के बाद चंदा बाबू ने सरकार के गुहार लगाई थी कि उसे दोबारा जेल भेजा जाए। शहाबुद्दीन को जून 2014 में हुए बहुचर्चित राजीव रौशन हत्याकांड में आरोपी बनाया गया है। इस मामले में पटना हाई कोर्ट ने 11 सितंबर 2016 को शहाबुद्दीन को जमानत दे दी थी।