#BIHAR #INDIA : सरकारी कर्मी है और किराये पर आयकर की छूट चाहिए तो मकान मालिक का पैन नंबर देना होगा। वित्त विभाग द्वारा सीएफएमएस (कंप्रीहेंसिव फायनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम) लागू किए जाने के बाद सरकारी कर्मियों के भुगतान से संबंधित बिलों पर ट्रेजरी द्वारा आपत्ति दर्ज करने के कई मामले सामने आए हैं। इनमें आयकर भुगतान का उल्लेख मकान किराया मद में किया गया है लेकिन मकान मालिक के पैन नंबर का उल्लेख नहीं है। वित्तीय प्रबंधन की ऑनलाइन नई प्रणाली सीएफएमएस के एक अप्रैल 2019 से लागू है। अब, ऐसे मामलों में ट्रेजरी स्तर पर दो बार आपत्ति दर्ज किए जाने पर बिल वित्त विभाग के पास आता है।

बिल बनाने के त्रुटिपूर्ण तरीके से भुगतान हो रहा बाधित
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालयों के द्वारा बिल बनाने में कई त्रुटिपूर्ण तरीके अपनाए जा रहे हैं। जिसके कारण बिलों के भुगतान को लेकर ट्रेजरी स्तर से किए जाने वाले आपत्तियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। जिससे बिलों के भुगतान में अनावश्यक देरी हो रही है। वित्त विभाग ने पिछले पांच-छह माह में प्राप्त विभिन्न आपत्तियों की समीक्षा की है।

कार्यालय प्रधान या डीडीओ के स्तर से पायी गयी त्रुटियां
सरकारी कार्यालयों के प्रधान या निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) के स्तर से की जा रही कई त्रुटियां सामने आयी है। ‘ बिल रिकॉल बाय डीडीओ’ इस तरह के करीब 20-25 फीसदी मामले है जो अनावश्यक है। असावधानीपूर्वक बिल बनाने के कारण ऐसा हो रहा है। दूसरा, बिल एवं प्राधिकार पत्र में दर्ज नाम में अंतर होने के कारण भी त्रुटियां हो रही है। बाहरी कार्यालयों जैसे-महालेखाकार, वेतन-पूर्जा शाखा, जीपीएफ कार्यालय इत्यादि से जारी प्राधिकार पत्र की डीडीओ भौतिक प्रति ट्रेजरी को नहीं भेज रहे हैं। तीसरे, बिल की स्वीकृति के आदेश में दर्ज सूचनाओं जैसे हेड ऑफ एकाउंट और भुगताने पाने वाले के नाम में अंतर पाया जा रहा है।

सबसे बड़ी त्रुटि यह भी पायी गयी है कि वेंडर, आपूर्तिकर्ता या संविदा पर नियुक्त कर्मी आदि जिनको सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान करना संभव है, वह राशि भी डीडीओ अपने पदनाम से खोले गए खाते में डालना चाहते हैं। यह सीएफएमएस प्रणाली के संपूर्ण उद्देश्य को समाप्त करने वाला वाले कदम है।
Source : live hindustan