आखिर क्यों भोले हैं भोलेनाथ? जानें ये अनोखा रहस्य ‘ॐ नमः शिवाय’

भगवान शिव के वैसे तो कई नाम हैं लेकिन उनके भक्त उन्हें भोलेनाथ ही पुकारना पसंद करते हैं. भोलेनाथ ऐसे देव जिन्हें प्रसन्न करना बहुत ही आसान है. इस शब्द का दार्शनिक मतलब है- भोले यानी बच्चे जैसी मा’सूमियत, नाथ मतलब भगवान, मालिक. भगवान शिव को जहां एक तरफ भोलेनाथ कहा जाता है तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें सृष्टि का विना’शक भी कहा जाता है. जो श्म’शान में बसते हैं और जिनके शरीर पर भ’स्म लिपटी रहती है, जिनके साथ भू’त-प्रे’त रहते हैं, ऐसे देव को भोलेनाथ क्यों कहा जाता है? लेकिन इन सबके बावजूद शिव भोले ही हैं. उनके अंदर ना अहं है ना ही चालाकी. उन्हें अपनी शक्ति पर बिल्कुल भी अभिमान नहीं है इसीलिए वह भोलेनाथ हैं.उन्हें भोलेनाथ कहे जाने के पीछे एक कहानी भी है. एक अ’सुर था जो हजारों वर्षों से त’पस्या कर रहा था. भगवान शिव की उपासना में दिन-रात लीन. भगवान शिव भलीभांति जानते थे कि वह एक रा’क्षस है और उसे वरदान देना अच्छा नहीं होगा. फिर भी वह प्रकट हुए और असुर से वरदान मांगने के लिए कहा. उस असुर का नाम भ’स्मासुर था. भ’स्मासुर ने भगवान शिव से वरदान मांगा कि वह जो कुछ भी छुए, तुरंत भ’स्म हो जाए. शिव ने तुरंत उसे यह व’रदान दे दिया. अब भस्मासुर वरदान की परीक्षा लेना चाहता था.

भगवान शिव की उपासना में दिन-रात लीन. भगवान शिव भलीभांति जानते थे कि वह एक रा’क्षस है और उसे वरदान देना अच्छा नहीं होगा. फिर भी वह प्रकट हुए और असुर से वरदान मांगने के लिए कहा. उस असुर का नाम भ’स्मासुर था. भ’स्मासुर ने भगवान शिव से वरदान मांगा कि वह जो कुछ भी छुए, तुरंत भ’स्म हो जाए. शिव ने तुरंत उसे यह व’रदान दे दिया. अब भस्मासुर वरदान की परीक्षा लेना चाहता था.ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव अपने भक्त को खाली हाथ नहीं लौटाते हैं इसीलिए भोले अपनी जान बचाकर भागने लगे. तब भगवान विष्णु ने एक चाल चली और मोहिनी का भेष धारण किया. भगवान विष्णु मोहिनी के रूप में असुर को मोहित करने के लिए नृत्य करने लगे और भस्मासुर का हाथ चालाकी से उसके सिर पर ही रखवा दिया. इस तरह से भस्मासुर नाम के राक्ष’स से मु’क्ति मिली.

इसीलिए तो भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है जिनसे वरदान पाना सबसे आसान है.भगवान शिव उन लोगों पर प्रसन्न हो जाते हैं जो अपना काम मेहनत से करते हैं. उन्हें मनाने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत नहीं पड़ती है. उनके भक्त जो भी वरदान मांगते हैं, वह देते हैं. चाहे इंसान हो या राक्षस हो, वह सबकी मनोकामना पूरी करते हैं. तारकासुर नाम के राक्ष’स ने क’ठोर तप’स्या की थी. भगवान शिव उस पर भी प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा. तब तारकासुर ने शिव से वरदान मांगा कि भगवान शिव के पुत्र के अलावा कोई उसे मार नहीं सकेगा. भोलेनाथ ने बिना सोचे उसे वरदान दे दिया.भगवान शिव अपने भक्तों की रक्षा के लिए सब कुछ करते हैं. उन्होंने अपने कंठ में वि’ष एकत्रित कर लिया. सागर मंथन से निकले वि’ष को भगवान शिव ने पी लिया और उनका कंठ नीला पड़ गया तभी से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा.वह उदारता के प्रतीक हैं. भोला यानी जो सब कुछ आसानी से भूल जाते हैं.

जो लोग भूलने में विश्वास रखते हैं, उनके नाथ हैं भोलेनाथ. भगवान शिव को किसी भी तरह की राजनीति नहीं आती है. वह औ’घड़ है और अपनी मर्जी से सब कुछ करते हैं. वह किसी के आदेश पर नहीं चलते हैं. उन्हें यह भी याद नहीं रहता है कि मां पार्वती ने उनसे क्या करने के लिए कहा और क्या नहीं. उन्हें सांसारिक चीजों का रत्ती भर भी ज्ञान नहीं है, वह तो ध्यानमग्न रहते हैं. इन्हीं सब वजहों से वह भोलेनाथ हैं. भस्मासुर को लगा कि अगर वह भगवान शिव को ही भ’स्म कर दे तो फिर उससे ज्यादा श्रेष्ठ कोई नहीं रह जाएगा.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading