चिकित्सा जांच के बाद उसका सोनोग्राफी टेस्ट कराया गया। सोनोग्राफी में पता चला कि बच्ची एक दुर्लभ चिकित्सा स्थिति में है जिसे ‘गर्भस्थ’ शिशु में भ्रू’ण कहा जाता है। उन्होंने बताया, ”इस स्थिति में पेट में एक अन्य शिशु का अविकसित भ्रू’ण पाया जाता है। उन्होंने बताया कि नवजात बच्ची की हा’लत सामान्य है और जांच में पता चला कि अविकसित भ्रू’ण उसके किसी अंग से जुड़ा नहीं है।डॉ. गांधी ने बताया, ”लड़की को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। जब बच्ची का वजन करीब 4-5 किलोग्राम होगा तब हम भ्रूण हटाने की सर्जरी करेंगे।
रायपुर के डॉ. नितिन शर्मा यह स’र्जरी करेंगे जो पहले भी दो बार ऐसी स’र्जरी कर चुके हैं।”बच्ची की सोनोग्राफी करने वाले विकिरण चिकित्सक डॉ. अमित मोदी ने कहा कि ऐसी स्थिति पांच लाख नवजातों में से एक में पायी जाती है और देश में ऐसे केवल 9-10 माम’ले ही सामने आते हैं। डॉ. मोदी ने कहा, ”ऐसी स्थिति सामान्य तौर पर जुड़वा बच्चों के साथ गर्भधारण करने पर होती है। एक भ्रू’ण का विकास नहीं होता और आखिरकार वह दूसरे भ्रू’ण में मिल जाता है।”


