#DIWALI_2019: जानें कैसे करे माँ लक्ष्मी को प्रसन्न, सुभ मुहुर्त

शुभ मुहुर्त में पूजन से मां लक्ष्मी की खास कृपा
ज्योतिषी ई.प्रशांत कुमार के मुताबिक धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में पूजा करने पर लक्ष्मी व्यक्ति के पास ही निवास करती हैं। “ब्रह्मपुराण” के अनुसार आधी रात तक रहने वाली अमावस्या तिथि ही महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ होती है। अमावस्या आधी रात तक नहीं होती है तब प्रदोष व्यापिनी तिथि लेनी चाहिए। लक्ष्मी पूजा व दीप दानादि के लिए प्रदोषकाल ही विशेष शुभ माने गए हैं।

अमावस्या का संयोग इस बार दो दिन

ज्योतिषी कुमार के मुताबिक इस वर्ष कार्तिक अमावस्या का संयोग दो दिन हो रहा है। सोमवार की सुबह नौ बजे तक अमावस्या है। रविवार को दोपहर 12:13 से अमावस्या शुरू है। यह अमावस मध्याह्न, अपराह्न, सांय काल, प्रदोष काल, निशिथकाल, महा निशिथकाल से युक्त होगी। इसलिए 27 अक्टूबर को ही दीपावली पूजन किया जाना चाहिए।

वृष लग्न में पूजा से मिलेगी आर्थिक समृद्धि

वैदिक ज्योतिषी पं.धीरेंद्र कुमार तिवारी के मुताबिक दीपावली पूजा वृष लग्न में ही करना चाहिए। इससे आर्थिक समृद्धि के साथ शांति और आनंद की प्राप्ति होगी। वृष लग्न सायं 6.21 से 8.18 बजे के बीच है। दीपावली पूजन 6:30 सायं के बाद शुरू हो जाय तो अच्छा है।

स्थिर लग्न में पूजन से मां लक्ष्मी का स्थायी निवास

आचार्य डा. राजनाथ झा के अनुसार स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा का खास महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस लग्न में पूजन से मां लक्ष्मी का घर व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्थायी निवास होता है।

रामायण, महाभारत काल से ही दीपावली की परंपरा

ज्योतिषी पीके युग के अनुसार रामायण और महाभारत काल से ही देश में दीपावली की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से वापस अयोध्या लौटने और पांडवों के 13 वर्ष के वनवास-अज्ञातवास से लौटने पर लोगों ने दीप जलाकर अपनी खुशी का इजहार किया था। स्कंध पुराण,विष्णु पुराण के मुताबिक भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी के विवाह के उपलक्ष्य में दीपावली मनायी जाती है।

पूजन का शुभ मुहुर्त:-

वृष लग्न सायं 6.21 से 8.18 बजे के बीच
स्थिर वृष लग्न: शाम 6:42 से रात्रि 8:37 बजे
निशिथ काल: शाम 5:40 से रात्रि 7:18 बजे
कर्क और सिंह लग्न : रात्रि 10:50 से 01:14 बजे के बीच

पूजन सामग्री :-

कलश, कुबेर, महालक्ष्मी व श्री गणेश की प्रतिमा,दक्षिणवर्ती शंख,
कमलगट्टा, गोमतीचक्र व छोटा नारियल ,श्री लक्ष्मी पादुका,श्रीयंत्र व पुस्तक पूजन ।


महालक्ष्मी होंगी ऐसे प्रसन्न —

दूभि,ईत्र, हल्दी,कुमकुम, अक्षत एवं कमलगट्टा से पूजन करें ।

दीपावली पर ये अर्पण करें :-

कौड़ी:-कर्ज से मुक्ति, दुर्घटना से बचाव
कमलगट्टा: स्थिर धन, पुत्ररत्न की प्राप्ति
कमल फूल: सौभाग्य, सुख
चावल की खीर: धन-धान्य
ईत्र व धनिया: आकस्मिक धन लाभ, राजनैतिक धन लाभ
पीली सरसो : शत्रु-बाधा का नाश, कर्ज से मुक्ति

दीपावली के दिन पाठ करें :-

कनकधारा स्रोत ,श्रीसूक्त पाठ,
-दक्षिणामुखी शंख की स्थापना करें ,
-अशोक वृक्ष के नीचे दीप जलाएं

दीपावली पर परंपराएं :-

मां महालक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अल्पना (रंगोली) बनायी जाती है। साथ ही शुभ-लाभ व स्वास्तिक भी बनायी जाती है।

दरिद्रा को भगाने की भी परंपरा
दीपावली की आधी रात के बाद दरिद्रा को भगाने की परंपरा भी निभायी जाती है। घर के वरीय सदस्य आधी रात के बाद और सुबह होने से पहले बांस के बने टूटे-फूटे सूप को झाड़ू से पीटते हुए दूर फेंक आते हैं।

पितरों की भी होगी विदाई
पितृपक्ष में आए पितरों की भी दीपावली पर विदाई की जाती है। पावली की रात उल्का जलाकर पितरों को लौटने का रास्ता दिखाया जाता है।

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