#PATNA : महापर्व की तैयारी युद्धस्तर पर, 150 से 200 रुपए जोड़ा बिक रहा मिट्टी का चूल्हा

#PATNA #BIHAR #INDIA : छठ पूजा के लिए चार दिन महत्वपूर्ण हैं नहाय-खाय, खरना या लोहंडा, सांझा अर्घ्य और सूर्योदय अर्घ्य। छठ की पूजा में गन्ना, फल, डाला और सूप आदि का प्रयोग किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, छठी मइया को भगवान सूर्य की बहन बताया गया हैं। इस पर्व के दौरान छठी मइया के अलावा भगवान सूर्य की पूजा-आराधना होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों की अर्चना करता है उनकी संतानों की छठी माता रक्षा करती हैं। कहते हैं कि भगवान की शक्ति से ही चार दिनों का यह कठिन व्रत संपन्न हो पाता है।

छठ को लेकर बिहार के बाजार गुलजार हो गये और वहां रौनक देखने को मिल रही है। खरना का प्रसाद आम की लकड़ियों से जलाये जाने वाले चूल्हे पर बनाने की परंपरा है। इसलिए महापर्व में आम की लकड़ियों का महत्व बढ़ जाता है। आम की लकड़ी 30-40 रुपए प्रति किलो बेची जा रही है। इस लकड़ी के साथ ही मिट्टी के चूल्हे और मिट्टी के अन्य बर्तनों की खरीददारी भी हो रही है। मिट्टी का चूल्हा 150 से 200 रुपए जोड़ा बिक रहा है। खरना के दिन से ही चूल्हे का इस्तेमाल शुरू हो जाता है, इसलिए लोग इसे पहले खरीद रहे हैं। पटना जिला प्रशासन के आदेश से गंगा नदी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गो पर तोरण द्वारा बनाये जा रहे है और पूरे मार्ग को रंगीन बल्बों से सजाया जा रहा है ।

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