#UP #INDIA : एनएचएआई ने लखनऊ हाईवे से आने-जाने वाले वाहनों पर बड़ा बोझ डालने की तैयारी शुरू कर दी है। रामादेवी से जाजमऊ गंगा पुल उस पार तक हाईवे का मेन्टीनेंस नहीं हो पा रहा है। 5 किलोमीटर एलीवेटेड हाईवे के मेन्टीनेंस पर एनएचएआई को हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। इसलिए एनएचएआई ने अब जाजमऊ गंगा पुल उस पार नया टोल बनाकर हर वाहन से टोल लेने का प्रस्ताव कर दिया है। इस टोल पर एनएचएआई ने न्यूनतम टोल का प्रस्ताव किया है ताकि इसी के सहारे मेन्टीनेंस एजेन्सी को नियुक्त किया जा सके और एलीवेटेड का मेन्टीनेंस भी होता रहे।

एनएचएआई ने इंडियन हाईवे मैनेजमेन्ट कम्पनी को प्रस्ताव देकर रिपोर्ट मांगी है। प्रस्ताव में साफ किया गया है कि जाजमऊ में गंगा पर दो पुल अलग-अलग हैं। पुराने पुल पर हर साल मेन्टीनेंस पर औसतन डेढ़ करोड़ की धनराशि खर्च होती है। साथ ही एनएच-2 तक लखनऊ एलीवेटेड पुल के रखरखाव का हर साल ठेका देना पड़ता है। अभी तक एलीवेटेड पुल के लिए कोई भी मेन्टीनेंस एजेन्सी नियुक्त नहीं की गई है। एनएचएआई को अपने बजट से ही मेन्टीनेंस कराना पड़ता है। सफीपुर में दोनों तरफ रैम्प भी बने हैं। उनका भी एनएचएआई अपने बजट से ही मेन्टीनेंस करता है।

रामादेवी से लेकर गंगा उस पार तक करीब 7 किलोमीटर के मेंटीनेंस की जिम्मेदारी एनएचएआई की है। बाकी हाईवे का मेंटीनेंस पीएनसी कर रही है। मेन्टीनेंस बोझ कम करने के लिए एनएचएआई कानपुर रीजन ने प्रस्ताव दिया था कि पीएनसी नवाबगंज में टोल बढ़ा दें और वाहनों से वसूली गई अतिरिक्त धनराशि एनएचएआई को भुगतान कर दें। इस प्रस्ताव पर एनएचएआई लखनऊ रीजन और मेन्टीनेंस एजेन्सी पीएनसी इंफ्राटेक ने अव्यवहारिक बताकर खारिज कर दिया है। पीएनसी इंफ्राटेक ने वसूली पर सख्त आपत्ति जताई। उसकी दलील है कि अपने प्लाजा से वह अपने हिस्से का टोल वसूलती है।
