पूरी दुनिया के साथ ही भारत इन दिनों आर्थिक सुधारों के प्रभाव का सामना कर रहा है – वेंकैया नायडू

उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि पूरी दुनिया के साथ ही भारत इन दिनों आर्थिक सुधारों के प्रभाव का सामना कर रहा है, लेकिन देश पर इन आर्थिक सुधारों का केवल तात्कालिक प्रभाव पड़ेगा। देहरादून स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) के 17वें दीक्षांत समारोह में एम वेंकैया नायडू ने बतौर मुख्य अतिथि सभा को संबोधित किया। उन्होंने मेधावी छात्रों को मेडल और डिग्री प्रदान की।

कहा कि विश्व में भारत एक मात्र देश है, जो छह फीसदी की दर से विकास की ओर अग्रसर है। अन्य देश दो से तीन फीसदी विकास दर ही रखते हैं। ऐसे में इन आर्थिक सुधारों का ज्यादा असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभाशाली लोगों की कमी नहीं है। मानव संसाधन के बल पर देश आर्थिक प्रगति के साथ दुनिया को दिशा दिखाने की ताकत रखता है। कहा कि देश में 25 वर्ष से कम आयु के युवाओं की बड़ी आबादी है। विश्व में सर्वाधिक तेजी से विकास की ओर अग्रसर देशों में भारत पहले नंबर पर है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय उद्योग केंद्रित शिक्षा का है। पंचतत्वों के साथ इंजीनियरिंग, शिक्षा, मैनेजमेंट, लॉ आदि में अवसरों की भरमार है। उन्होंने कहा कि वह पूरे विश्व में जहां भी गए। वहां भारत को लेकर नई पहचान और नया जोश देखने को मिला है। हर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधार और परिवर्तन हो रहे हैं। कहा कि विश्व में सबसे पुरानी संस्कृति भारत की है। वसुधैव कुटुबकंम और सर्वे भवंतु सुखिना जैसे संदेश भारत की धरती से ही निकले हैं। प्राचीन समय में नालंदा और तक्षशीला जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय भारत में रहे।

इनमें शिक्षा लेने के लिए देश-विदेश से छात्र आते थे। संपूर्ण विश्व का ध्यान भारत पर केंद्रीत है। विश्व में सबसे प्राचीन संस्कृति भारत की है। भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां ज्ञान और संपदा के साथ सबकुछ था। कहा कि भारत में ज्ञान और संपदा सब कुछ था, जिसे धोखा देकर बाहरी आक्रांताओं ने समय-समय पर नुकसान पहुंचाया। कहा कि अब युवाओं का दायित्व बनता है कि वह देश का गौरवशाली इतिहास वापस लौटाने के लिए काम करें।

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