नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि कर्ज के तले दबी सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया का निजीकरण हर हाल में होगा। उन्होंने बताया कि एयर इंडिया को बेचने की प्रक्रिया जारी है। अब इसके निजीकरण के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

आगे उन्होंने कहा कि एयर इंडिया प्रथम श्रेणी की एयरलाइन है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि इसका निजीकरण किया जाएगा। हम इसका विनिवेश जल्द से जल्द करने की कोशिश कर रहे हैं।
करीब 60 हजार करोड़ के कर्ज में दबी एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2018-19 में 8,400 करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ है। एयर इंडिया को ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और विदेशी मुद्रा में घाटे के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। इन हालातों में एयर इंडिया तेल कंपनियों को ईंधन का बकाया नहीं दे पा रही है।
