
MUZAFFARPUR (ARUN KUMAR) : क्वारें’टीन सेंटर में कुव्य’वस्था के नाम पर हंगा’मा रुकने का नाम नहीं ले रहा है. तीसरे चरण के लॉ’कडाउन के बीच बिहार लौट रहे प्रवा’सी मज’दूरों के लिए बनाए गए क्वा’रेंटीन सेंटर मे सरकार ने क्या इंत’जाम किए हैं इसकी हकी’कत अब किसी से नहीं छि’पी है. सरकार और जिला प्रशासन के बया’नों पर यकी’न करें तो प्र’वासी मजदू’रों के लिए मुकम्म’ल व्यव’स्था है, सी’माएं भी पूरी तरह सी’ल हैं, सी’माओं पर सैनिटा’इजेशन के पुरे प्र’बंध हैं. पर हकी’कत इससे जुदा हैं.

जो तस्वीरें और खबरें सामने आ रही है वो बेहद दुर्भा’ग्यपूर्ण है. राज्य सरकार को अपनी आलो’चना पसंद नहीं. गरी’ब मज’दूरों से रेल कि’राया और रेल कि’राया के अतिरिक्त पैसे वसू’लने और सूबे के कई क्वैरे’न्टाइन सेंटर पर प्रशासन की कुव्य’वस्था की खबर जैसे ही मीडिया में आई राज्य सरकार की भद्द पि’ट गई. आनन् फानन में मीडिया को ट्रेनों की जानकारी नहीं दिए जाने और क्वै’रेन्टाइन सेंटर पर मीडिया पर प्रतिबं’ध लगा दिया गया.

पर ये सोशल मीडिया का जमाना है साहब, स’च्चाई बाहर आते देर नहीं लगती चाहे आप कितना भी मीडिया पर प्रतिब’न्ध क्यों ना लगा दें. गरीब मज’दूरों के प्रति आपकी कुव्य’वस्था के जीते जागते स’बूत ही आपकी कथ’नी और करनी का अंत’र बयां कर रही है, की आपके अधिकारी प्रवा’सी मज’दूरों की सुविधाओं को लेकर कितने सज’ग और संवेद’नशील हैं.

मामला मुजफ्फरपुर जिले के बेला थानांतर्गत बेला औद्योगिक क्षेत्र में फेज 2 स्थित महिला पॉलिटेक्निक और पारु के मोती छपरा स्थित क्वारं’टाइन सेंटर का हैं, जहाँ खाना और पीने के साफ पानी की उ’चित व्य’वस्था न होने पर मज’दूरों ने ज’मकर हंगा’मा किया. पारु के मिडिल स्कूल में बने पृथ’क निवास में क्वैरे’न्टाइन किये गए म’जदूरों का आ’रोप है की जिला प्रशासन द्वारा क्वै’रेन्टाइन तो कर दिया गया पर खाने पीने की कोई उ’चित व्य’वस्था नहीं की गई है.

मिली जानकारी के अनुसार प्रशासन की इस बदइं’तजामी को लेकर जब वि’रोध जता’या गया तो अधिकारियों ने प्रवासी मजदूरों से अभ’द्र व्यव’हार किया और अप’शब्द भी बोले गए. आक्रो’शित मज’दूरों ने पारू प्रखंड के मोती छपरा मिडिल स्कूल क्वा’रेंटीन सेंटर पर हं’गामा करना शुरू कर दिया. श्रमि’कों को सम’झाने पहुंचे प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार सिन्हा और अंचलाधिकारी को भी ख’री खो’टी सुनाई और सरकार विरो’धी ना’रेबाजी करते हुए ज’मकर हं’गामा किया.

मजदूरों ने SH 74 को भी जा’म कर दिया. स्थिति यहाँ तक पहुँच गयी कि अप’शब्द बोले जाने को लेकर पारु के प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार सिन्हा को प्र’वासी मज’दूरों के समक्ष हाथ जोड़ने तक कि नौ’बत आन पड़ी.

वहीं शहरी क्षेत्र में बेला थानांतर्गत बेला औद्योगिक क्षेत्र फेज 2 में महिला पॉलिटेक्निक ने बने क्वैरे’न्टाइन सेंटर में रह रहे श्रमि’कों का आ’रोप था कि बीते शनिवार को 3 मरीजों के संक्र’मित पाए जाने पर उन्होंने कमरों को सैनि’टाइज करने कि मांग करते हुए प्रशासन से फिर से जां’च कराने कि मां’ग कि थी. मज’दूरों ने आ’रोप लगाते हुए कहा कि सुवि’धाओं कि मां’ग पर बेला थानाध्यक्ष द्वारा अभ’द्र व्यवहार किया जाता हैं.

बताया जाता है कि बेला के जिस क्वारें’टीन सेंटर से शनिवार को 3 कोरोना पॉजि’टिव मरी’ज पाए गए थे वहां पृथ’क निवास में रह रहे प्रवा’सी मज’दूरों को खाना नहीं दिया गया था. जिसके बाद उन्होंंने हं’गामा करना शुरू कर दिया. खाना नहीं मिलने से गु’स्साए 76 प्रवा’सी मज’दूर क्वा’रेंटीन सेंटर से बा’हर निकल गए और बाहर से खाना खाकर घूमते फिरते शाम तक क्वै’रेन्टाइन सेंटर लौटे.

बीते शुक्रवार को भी गायघाट प्रखंड में बने क्वै’रेन्टाइन सेंटर में खाने पीने की उचि’त व्यव’स्था ना होने पर श्र’मिकों ने हंगा’मा किया था.
पृ’थक केंद्र में रह रहें श्र’मिकों का कहना है की सरकार ने क्वारं’टाइन सेंटर तो बनवा दिया हैं लेकिन व्य’वस्था में फे’ल साबित हो रही है. श्र’मिकों का कहना है कोरोना संक्र’मण से तो नहीं बल्कि सरकार की कुव्य’वस्था से ही हम म’र जायेंगे. बता दें की मुजफ्फरपुर जिले में प्रवा’सियों के लिए कुल 50 क्वैरे’न्टाइन सेंटर बनाये गये हैं.

ख़बरों के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र के फेज 2 में महिला पॉकिटेक्निक में बने क्वैरे’न्टाइन सेंटर हो या पारु प्रखंड के मोती छपरा स्थित मिडिल स्कूल में प्रवासियों हेतु बना क्वैरे’न्टाइन सेंटर, समय पर अ’च्छा खाना और पीने का सा’फ़ पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण मज’दूरों ने हंगा’मा खड़ा कर दिया.

राज्य सरकार के मीडिया पर प्रतिब’न्ध लगाएं जाने के बावजूद सोशल मीडिया के दौर में किसी ना किसी माध्यम से सरकार कि नाकाम’याबियों कि खबरें मीडिया तक पहुँच ही जाती हैं. अब आप खुद ही अंदा’जा लगाइये कि क्या वाकई बिहार के प्रवा’सी मजदूरों के लिये सरकार कि सारी तैयारियां मु’कम्मल हैं? अगर सही में सरकारी तैयारियां मुक’म्मल होती तो बिहार में संक्र’मण इतनी तेजी से ना फै’लता, ना ही लाखों म’जदूरों को अपने बच्चों का पेट पा’लने दूसरे राज्यों में जाना होता.


